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तबला सम्राट पंडित किशन महाराज की पुण्यतिथि आज, जिंदगी जीने का अंदाज़ हमेशा रहा बिंदास

Fri, 04 May 2018 03:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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किशन महाराज - फोटो : SELF
पूरी दुनिया में काशी के संगीत जगत को नई ऊंचाई देने वाले  पद्मविभूषण तबला सम्राट पंडित किशन महाराज की आज 10वीं पुण्यतिथि है। किशन महाराज का जिंदगी जीने का अंदाज़ बहुत बिंदास रहा। जो बनारसीपन से ओतप्रोत था। उन्होंने जिंदगी को हमेशा आज के आईने में देखा और अपनी मर्जी के मुताबिक बिंदास जिया। जीवन के साथ और जीवन के बाद भी बनारस की शान रहे तबला सम्राट की कई दूसरी खूबियां भी थीं। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके बारे में...

 
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kishan maharaj - फोटो : social media

तबला सम्राट किशन महाराज ने तबले की थाप से संगीत की दुनिया में एक अलग ही मुकाम स्थापित किया है।  शहर में जैसे इंसान बसते हैं उसी तरह इंसान में वह शहर भी बसता है। कुछ ऐसा ही संबंध बनारस और तबला सम्राट पंडित किशन महाराज के बीच भी था। वो बनारस में पैदा हुए, यहीं उनका बचपन बीता। इसके बाद उन्होंने अपने तबला वादन की कला को पूरी दुनिया में विस्तार दिया। 

 
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kishan maharaj - फोटो : facebook

किशन महाराज का जन्म वाराणसी के कबीरचौरा मुहल्ले में 1923 में एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ। कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण उनका नाम किशन पड़ा। उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में पिता पंडित हरिमहाराज से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। पिता के देहांत के बाद उनके चाचा एवं पंडित बलदेव सहाय के शिष्य पंडित कंठे महाराज ने उनकी शिक्षा-दीक्षा का कार्यभार संभाला। 

 

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kishan maharaj - फोटो : अमर उजाला
तबले की आरंभिक यात्रा के कुछ साल बाद ही उस्ताद फैय्याजखान, पंडित ओंकार ठाकुर, उस्ताद बड़े गुलाम अलीखान, पंडित भीमसेन जोशी, वसंत राय, पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान जैसे बड़े कलाकारों के साथ संगत की। नृत्य की दुनिया के महान हस्ताक्षर शंभु महाराज, सितारा देवी, नटराज गोपी कृष्ण और बिरजू महाराज के कार्यक्रमों में भी उन्होंने तबले पर संगत की। 

 
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kishan maharaj - फोटो : अमर उजाला

लुंगी कुर्ते में पूरे मुहल्ले की टहलान और पान की दुकान पर मित्रों के साथ जुटान ताजिंदगी उनका शगल बना रहा। मर्जी हुई तो भैरो सरदार को एक्के पर साथ बैठाया और घोड़ी को हांक दिया। तबीयत में आया तो काइनेटिक होंडा में किक मारी और पूरे शहर का चक्कर मार आए। 

 
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kishan maharaj - फोटो : अमर उजाला
किशन महाराज को वर्ष 2002 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष1973 में पद्मश्री, वर्ष 1984 में केंद्रीय संगीत नाटक पुरस्कार, वर्ष 1986 में उस्ताद इनायत अली खान पुरस्कार, दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार और तालविलास के अलावा उत्तरप्रदेश रत्न, उत्तरप्रदेश गौरव भोजपुरी रत्न, भागीरथ सम्मान और लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से भी नवाजा गया।
 
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तबला सम्राट किशन महाराज और पूरण महाराज - फोटो : अमर उजाला

उनके पुत्र और ख्यात तबला वादक पं. पूरण महाराज ने बताया कि उनकी दिनचर्या पूजा पाठ, टहलना, रियाज, अपने शौक पूरे करना, मित्रों से गप्पे मारना था। यह सब ज़िंदगी की आखिरी घड़ी तक जारी रहा। वे बड़ी बेबाकी से कहते थे कि मैं कोई उलझन या दुविधा नहीं पालता बल्कि उसे जल्दी से जल्दी दूर कर देता हूं। ताकि न रहे बांस और न बजे बांसुरी। साठ साल पहले शेविंग के दौरान मूंछें सेट करने में एक तरफ छोटी तो दूसरी तरफ बड़ी हो जाने की दिक्कत महसूस की तो झट से उसे पूरी तरह साफ करा दिया। इसके बाद फिर कभी मूंछ रखने की जहमत नहीं उठाई। 

 
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