पिछले पांच साल से फरार एक लाख का इनामी बदमाश दीपक वर्मा उर्फ गुड्डू को एसटीएफ वाराणसी इकाई ने सोमवार दोपहर चौबेपुर के बरियासनपुर में मुठभेड़ में मार गिराया। वाराणसी और प्रयागराज के विभिन्न थानों में 23 आपराधिक मुकदमे का आरोपी दीपक वर्मा भाड़े पर हत्या, लूट, फिरौती समेत अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था।
वर्ष 2011 में जरायम की दुनिया में कदम रखने वाला दीपक वर्मा एक दशक तक आतंक का पर्याय बना रहा। छह साल पूर्व नवंबर 2015 में रामापुरा वार्ड के चर्चित पार्षद शिव सेठ की हत्या, 2015 में औरंगाबाद निवासी गोलू यादव की हत्या और जून 2016 में प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल के बाहर ज्ञानचंद्र यादव और गनर लालता प्रसाद की गोली मारकर हुई हत्या को अंजाम शार्प शूटर दीपक वर्मा ने ही दिया था।
वह इतना शातिर था कि बनारस से प्रयागराज तक की पुलिस उसे पांच-छह साल से पकड़ने का जाल ही बिछाती रह गई। आतंक का दीपक बुझाने में एसटीएफ को छह साल लग गए। सात दिसंबर 2018 को एडीजी जोन वाराणसी ने दीपक के ऊपर एक लाख का इनाम घोषित किया था। आगे की स्लाइड्स में देखें
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एक लाख के इनामी बदमाश दीपक को एसटीएफ ने किया ढेर
- फोटो : अमर उजाला
दीपक इतना था बेखौफ था कि चिकित्सकों के चैंबर में घुसकर पिस्टल की नोक पर रंगदारी वसूलता था। चार साल पूर्व अर्दली बाजार स्थित बाल रोग विशेषज्ञ एक चिकित्सक से बड़ी रकम रंगदारी के तौर पर वसूली थी। उसके बाद चिकित्सक ने बनारस का अपना ठिकाना ही बदल दिया था।
चिकित्सकों और व्यापारियों को रंगदारी के लिए धमकी, सराफा कारोबारियों से लूट सहित भाड़े पर हत्या करने वाले लक्सा रामापुरा निवासी दीपक वर्मा को अपराध की सीढ़ी उसके मामा लालू वर्मा ने चढ़ना सिखाया था। पार्षद विजय वर्मा की हत्या में वांछित मामा लालू वर्मा को नोएडा पुलिस ने 2008 में मुठभेड़ में मार गिराया था।
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मारे गए मुन्ना बजरंगी के शार्प शूटर दीपक वर्मा पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और रंगदारी समेत 26 मुकदमे थे। एक जुलाई 2011 को पहली बार लूट के मुकदमे में चेतगंज पुलिस ने दीपक को जेल भेजा था। इसके बाद छूट कर बाहर आया तो सिगरा में ही 2011 में लूट के वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद तो जरायम जगत में उसकी पैठ बढ़ती ही गई। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपक के परिजन भी उसकी वजह से काफी परेशान रहते थे। मां सुमन, भाई मुन्ना, बहन दीपमाला, चाचा रविंद्र को कई बार परेशानी में डाल चुका था।
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दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के पतालेश्वर गली में 14 सितंबर 2018 में 50 हजार इनामी रईस बनारसी और हिस्ट्रीशीटर राकेश अग्रहरि के बीच गैंगवार हुआ था। उस समय रईस बनारसी की ओर से दीपक वर्मा ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हिस्ट्रीशीटर राकेश अग्रहरि की हत्या कर दी थी। गैंगवार में रईस बनारसी और दीपक को भी गोली लगी थी।
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एक लाख के इनामी बदमाश दीपक को एसटीएफ ने किया ढेर
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गोली लगने के बावजूद दीपक बाइक पर रईस बनारसी को बैठाकर नई सड़क की ओर भागा था। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि दशक पूर्व लूट व रंगदारी की घटनाओं में दीपक का नाम जब जमने लगा तो उसकी मुलाकात रईस बनारसी से हुई। कानपुर में दिनदहाड़े शानू ओलंगा की हत्या करने वाले रईस बनारसी ने उसे जरायम में निखारा।
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एक लाख के इनामी बदमाश दीपक को एसटीएफ ने किया ढेर
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पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार बनारस सहित आसपास जनपदों में दीपक के आतंक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग उसके खिलाफ थाने जाने में डरते थे। दो साल पूर्व तक कई ऐसे चिकित्सक और शिक्षण संस्थान के निदेशक सहित अन्य कई व्यापारियों से रंगदारी वसूलता था। 25 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था।
एक लाख के इनामी बदमाश दीपक को एसटीएफ ने किया ढेर
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माफिया मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हुई हत्या के बाद दीपक वर्मा ने खुद का गिरोह बनाया। एसटीएफ के एक अधिकारी के अनुसार दीपक ने बनारस सहित आसपास जनपद के युवाओं को गिरोह में जोड़ रखा था। गिरोह का काम लूट की बड़ी घटनाओं को अंजाम देना और बड़े कारोबारियों से रंगदारी, असलहों की तस्करी, जमीन की पंचायत में दखल देना था। भाड़े पर हत्या की कई घटनाओं को दीपक के गिरोह ने अंजाम दिया।