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रामनगर की रामलीला: प्रभु श्रीराम को देख ठहर गईं सखियों की आंखें, पांचवें दिन हुई जनकपुर दर्शन, तस्वीरें

Thu, 11 Sep 2025 05:03 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Ramnagar Ramlila 2025: रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन जनकपुर दर्शन हुई। अष्टसखी संवाद तथा फुलवारी की लीला देख दर्शन मंत्रमुग्ध हुए। उधर, जनकपुर घूमने निकले प्रभु को देखने के लिए सखियां उमड़ पड़ीं। 
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रामनगर की रामलीला - फोटो : रोहित सोनकर
सांवला, सलोना और सुंदर आकर्षक रूप किसे नहीं लुभाता और श्रीराम लक्ष्मण का रंग-रूप औरतों के सामने हो तो कौन सम्मोहित हुए बिना रह सकता है। यही तो हुआ जनकपुर में। आंखे ठहर गईं, चित्त खो गया, नेत्र सुख की अभिलाषा थोड़ा और थोड़ा और बढ़ती गई। हर किसी को महसूस हुआ कि जानकी के योग्य तो यही वर है। ऐसे भावपूर्ण दृश्य बुधवार को रामलीला के पांचवें दिन और चौथी लीला के प्रसंग 36वीं वाहिनी पीएसी के कैम्पस में मंचित हुआ।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : रोहित सोनकर
लीला में जनकपुर दर्शन, अष्टसखी संवाद तथा फुलवारी की लीला हुई। एक प्रसंग में मुनि विश्वामित्र से अनुमति लेकर श्रीराम, लक्ष्मण के साथ जनकपुर देखने जाते हैं। दोनों भाइयों के जनकपुर पहुंचते ही इन्हें देखने के लिए काम-धाम छोड़ लोग दौड़ पड़ते हैं। अष्टसखी संवाद होता है। सखियां दोनों बालकों के रंग-रूप का आपस में बखान करती हैं। एक कहती है कि लगता है इन्होंने करोड़ों कामदेव की छवि को जीता है तो दूसरी बोली-हंस के बालकों के समान इनकी जोड़ी है।
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रामनगर की रामलीला - फोटो : रोहित सोनकर
तीसरी बोली- महाराजा जनक को धनुष यज्ञ छोड़ जानकी का विवाह इसी वर से कर देना चाहिए। चौथी सखी कहती है कि महाराज जनक प्रारब्ध के बशीभूत हैं, प्रतिज्ञा का हठ करके अविवेक दिखा रहे हैं। पांचवीं ने आशंकित होते हुए कहती है कि महाराज का धनुष बहुत कठोर है और यह बालक बहुत कोमल हैं। तभी सभी सखियां दुविधा में पड़ जाती हैं।

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रामनगर की रामलीला - फोटो : रोहित सोनकर
छठीं सहेली इस शंका को दूर करते हुए कहती है कि जिनके चरणरज पाते ही अहिल्या तर गई ये क्या बिना शिव धनुष तोड़े रह पाएंगे। सखिया दोनों भाइयों पर पुष्पवर्षा करने लगती हैं। इसके बाद दोनो भाइयो को रंगभूमि की रचना दिखाई जाती है। दोनों भाई विश्वामित्र के पास लौटकर शयन करते हैं। सुबह होने पर दोनों भाई फुलवारी जाते हैं। उसी समय गिरजा पूजन के लिए जानकी का आगमन होता है। वे गिरिजा स्तुति कर अपने लिए योग्य वर मांगती हैं। सखियां जानकी से राजकुमारों के रंग रूप का वर्णन करती हैं। सीता आश्चर्य चकित हो इधर उधर देखती हैं। 

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रामनगर की रामलीला - फोटो : रोहित सोनकर
सीता के पायल व गहनों की आवाज सुन भगवान श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि ऐसा लग रहा है मानो कामदेव ने विश्व विजय की ददुभी बजाई है। जानकी फिर गिरजा स्तुति करती हैं वर मांगती है कि मेरे मनोरथ को आप अच्छी तरह से जानती हैं तभी आकाशवाणी होती है कि तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी। सीता राजमहल लौट जाती हैं। श्रीराम विश्वामित्र के पास जाकर देरी का कारण बताते हैं।श्री राम चकई, चकवा और सूर्य उदय के बारे में मुनि विश्वामित्र से जानकारी लेते हैं। यही पर आरती के बाद लीला का विराम होता है।
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