Ramnagar Ramlila 2025: रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। लोगों में आस्था और उत्साह ऐसा है कि रविवार को बारिश के बीच छतरी के नीचे बैठकर लोग लीला देखते रहे।
आस्था-श्रद्धा, भक्ति और परंपरा के चार स्तंभों पर खड़ी रामनगर की रामलीला रंगकर्म के बजाय प्रभु श्रीराम की आराधना का जतन है। यह भाव जहां स्वरूपों-संयोजकों में नजर आता है, वहीं इसका मर्म लीलाप्रेमियों के दिल में उतर जाता हैं। रविवार को बारिश के बाद जहां रामलीला के पात्र छतरी के नीचे अभिनय कर रहे थे, वहीं श्रद्धालु छाता लगाकर लीला देख रहे थे।
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रामनगर की रामलीला
- फोटो : रोहित सोनकर
रामनगर की रामलीला में कभी खुशियां बाहें फैलाए निहाल करती हैं तो कभी पलकों की कोर से श्रद्धा की डोर जुड़ती है। गृहस्थ हो या साधु-संन्यासी हर एक की 31 दिनी अनुष्ठान में हर स्वरूप देवरूप में नजर आता है। नौवें दिन रविवार को हल्की बूंदाबांदी के बीच छाता और रेनकोट पहनकर लीलाप्रेमी लीला देखते रहे। प्रसंगानुसार भक्तों की भाव भंगिमा लगातार बदलती गई। प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की सूचना के साथ लीलाप्रेमी आनंदानुभूति से मगन मन झूम उठे।
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रामनगर की रामलीला
- फोटो : रोहित सोनकर
टाॅर्च की रोशनी में रामचरित मानस की चौपाइयां गुनगुनाने के उनके अंदाज में यह भाव नजर आया तो कैकेयी के कोप भवन जाने और उसका उद्देश्य समझ आने पर ह्रदय की वेदना का अहसास कराया। दशरथ के विलाप भरे संवाद समेत अवध कांड के मार्मिक प्रसंगों पर श्रद्धालुओं के पलकों की कोरें गीली हो गईं।
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रामनगर की रामलीला
- फोटो : रोहित सोनकर
पिता के वचनों का मान रखने की खातिर प्रभु श्रीराम के सहर्ष वन जाने की प्रतिबद्धता और नई नवेली दुल्हन सीता के भी सुख-वैभव त्याग इसे अपना भाग्य मानते हुए पति के साथ निभाने की प्रतिबद्धता विभोर कर गई। रामलीला के नौवें दिन कैकेई कोपभवन की लीला उदास माहौल में हुई। इस लीला के साथ ही अयोध्या कांड की शुरुआत हुई।
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रामनगर की रामलीला
- फोटो : रोहित सोनकर
मंथरा ने तरह-तरह से बातों में फंसाकर कैकेई को राजा दशरथ के दो दिए हुए वचनों को याद दिलाया। उसने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। श्रीराम सहर्ष वन जाने के लिए तैयार हो गए। राम उनसे वन जाने की बात बताकर अनुमति मांगते हैं, उसी समय सीता आकर उनके चरण पकड़कर उनको प्रणाम करती हैं तो उन्होंने उनको अचल सुहागन होने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद आरती के साथ कोप भवन की लीला को विश्राम दिया गया।
रामलीला में नौवें दिन हुई दशरथ सभा,कोप भवन की लीला का मंचन
शिवपुर की रामलीला मैदान में नौवे दिन रविवार को चल रहे लीला में दशरथ सभा, कोप भवन की लीला का मंचन किया गया। राजा दशरथ रानी कैकेई के दोनों वरदानों को सुनकर बेसुध होकर गिर जाते हैं और यहीं पर लीला को विराम दे दिया जाता है। चिरईगांव के जाल्हूपुर की रामलीला में रविवार को श्रीराम के राजतिलक प्रसंग का मंचन हुआ। विवाहोत्सव से गूंज रही अयोध्या के आनंदमय माहौल पर महारानी कैकेयी ने अपनी जिद और मंथरा की कुटिलता से ग्रहण लगा दिया। माता कौशल्या ने पुत्र राम को हृदय से लगाकर चिरंजीवी होने का आशीर्वाद दिया और वनगमन की अनुमति दी।