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आजमगढ़: न शोर और न भगदड़, लगातार हो रही मुठभेड़ों पर उठ रहे सवाल

Fri, 24 Aug 2018 10:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
यूपी के आजमगढ़ जिले में महज एक सप्ताह के भीतर रानी की सराय, अहरौला और महराजगंज थाना क्षेत्र में ताबड़तोड़ हुए तीन मुठभेड़ में 50 हजार के दो और 40 हजार के दो बदमाशों को गिरफ्तार कर पुलिस भले ही वाहवाही बटोर रही हो। लेकिन दिन हो या रात हर बार सुनसान रास्तों पर ही मुठभेड़ होना, किसी प्रत्यक्षदर्शी के खोजने पर भी नहीं मिलना, न शोर और न भगदड़ होना। कहानी को एक दम से फिल्मी बना दे रही हैं। जैसे सबकुछ पहले से ही तय हो। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
हालांकि इन बदमाशों से पकड़े या मारे जाने से लोगों को इतना सुकून है कि कोई खुल कर सवाल भी नहीं उठा रहा है। अंदर खाने इस बात की चर्चा जरूर होने लगी है कि कहीं बदमाशों पर घोषित इनाम और तमगा पाने के लिए कहानी नहीं बनाई जा रही है। 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
14 अगस्त की रात रानी की सराय थाने की पुलिस और बदमाशों के बीच रुदरी नहर की पटरी पर रात आठ बजे के बाद मुठभेड़ हुई। इसमें रानी की सराय थाने के जमालपुर गांव निवासी 50 हजार का इनामी विजय यादव पुलिस की गोली से घायल हुआ। साथी फरार हो गया। फरार बदमाश की गिरफ्तारी तो दूर पहचान तक नहीं हो पाई है। इसके बाद दूसरी मुठभेड़ 17 अगस्त की रात अहरौला बाइपास पर हुई। इसमें अतरौलिया का रहने वाला 50 हजार का इनामी अकबर अली पुलिस की गोली से घायल हुआ, जबकि उसके दो साथी फरार हो गए। 

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आजमगढ़ में मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
अभी इसकी जांच पड़ताल करने की बात कही जा रही थी कि अकबर के फरार दोनों साथी 40-40 हजार रुपये के ईनामी सचिन पांडेय उर्फ आकृति और सुजीत तिवारी दूसरे दिन 18 अगस्त की शाम साढ़े तीन बजे महराजगंज थाने के कटानी बाजार के पास हुई मुठभेड़ में घायल हो गए। पहले अकबर की गिरफ्तारी, फिर उसका भागना, मुठभेड़ में उसी का घायल होना, अगले दिन फिर मुठभेड़ और इसमें भी उसी के फरार दोनों साथियों का घायल होना। एक के बाद एक ये संयोग लोगों की समझ से भी परे हो रहे हैं। 
 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
हालांकि 18 की मुठभेड़ दिन के तीन बजे के बाद दिखाई गई, लेकिन ये भी ऐसे स्थान पर हुई जहां लोगों का आना-जाना न के बराबर रहता है। नतीजा ये हुए कि न कोई शोर हुआ, न भगदड़ और न ही यहां भी कोई प्रत्यादर्शी मिला। ले-देकर सारी कहानी फिर से फिल्मी हो गई। चूंकि पकड़े और मारे जाने वाले वास्तव में आपराधिक प्रवित्ति के हैं इसलिए कोई इसका विरोध भी नहीं कर रहा है। सवको इसी का संतोष है कि चलो बदमाशों से निजात तो मिल रही है।  
 
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encounter in Azamgarh
वहीं अहरौला बाजार निवासी दुकानदार जितेंद्र मोदनवाल उर्फ नाटे की हत्या करने वाले बदमाशों की ताबड़तोड़ मुझभेड़ में गिरफ्तारी से पर जहां भाजपाई पुलिस की पीठ थपथपा रहे हैं वहीं, पुलिस की माने तो यहां माहौल खराब करने की साजिश रची गई ती। इस बीच अफवाह अफवाह फैलाई गई कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। लोगों को उकसाकर माहौल बिगाडने का पूरा षड्यंत्र रचा गया। एसपी के समझाने पर जितेंद्र के परिवार के लोग भी मान गए थे, लेकिन कुछ लोग मामले में हवा भर रहे थे। कोशिश थी मामले तो जोरदार तरीके से भड़काया जाए। इसके इनपुट सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचे थे। 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने डीआईजी को फोन कर चेतावनी भी दी थी। सीएम की चेतावनी के बाद बदमाशों की धर पकड़ के लिए कई थानों की फोर्स लगाते हुए घटना के खुलासे के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। महज चार दिनों के भीतर तीन मुठभ़ेड़ में दो 50 हजारी और दो 40 हजारी बदमाशों को गिरफ्तार कर लेने से न केवल सरकार की इज्जत बच गई, बल्कि पुलिस की साख भी बनी रही।
 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
एसपी रविशंकर छवि का कहना है कि जितेंद्र मोदनवाल की हत्या के बाद कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देना चाहते थे। गुप्त तंत्रों से इस बात की जानकारी हुई। घटना का खुलासा करने के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई थी, जिसका परिणाम लोगों के समक्ष है। 
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