अगले माह की 17 तारीख को राष्ट्रपति पद के लिये होने वाले चुनाव में भले ही एनडीए ने रामनाथ कोविंद को अपना प्रत्याशी बनाने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन प्रमुख दलों की ओर से अभी तक कोई नामांकन दाखिल नहीं हुआ। इन सबके बीच बनारस के एक शख्स ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। गुरुवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उन्हें 120 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। आगे की स्लाइड्स में जानिए उस शख्स की कहानी ...
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- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर चुके इस शख्स को काशी का धरतीपकड़ कहा जाता है। इनका नाम है नरेंद्र नाथ दूबे अडिग। अडिग इसलिए क्योंकि 1984 से लगातार लोकसभा, विधानसभा और स्नातक चुनाव और उपचुनाव लड़ते आ रहे हैं। हार रहे हैं मगर अपने इरादे से डिग नहीं रहे। नरेंद्र नाथ दूबे अडिग ने मंगलवार को अपना फार्म भरा। पांचवीं बार राष्ट्रपति चुनाव के लिए अडिग ने पर्चा भरा है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले विश्व गुरु भारत परिषद से जुड़े लोगों ने अडिग का जोरदार स्वागत किया। पेशे से वकील नरेंद्र नाथ दूबे अडिग ने बताया कि नामांकन फार्म भरने के बाद वह वाराणसी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नामांकन के लिए 100 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। मुझे पश्चिम बंगाल और बिहार के 120 विधायकों का समर्थन है। भाजपा को छोड़कर बाकी पार्टी के नेताओं को समर्थन के लिए पत्र भेजा है। वो मुझे समर्थन देंगे।
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पेशे से वकील और राष्ट्रीय मानवाधिकार रक्षा समिति के अध्यक्ष नरेंद्र नाथ दूबे अडिग उस वक्त चर्चा में आए थे जब 2012 में हुए उप राष्ट्रपति के चुनाव में नामंकन के लिए कुछ सासंदों का फर्जी हस्ताक्षर वाला दस्तावेज जमा किए थे। 2014 लोकसभा चुनाव में बनारस से पीएम मोदी के खिलाफ भी दावेदारी पेश की थी मगर उनकी जमानत जब्त हो गई।
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एमए, एलएलबी की पढ़ाई कर चुके नरेंद्र नाथ दूबे अडिग 1984 में वाराणसी के एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। तब से लेकर आज तक जितने भी विधानसभा, लोकसभा, स्नातक विधान परिषद और उपचुनाव हुए सभी में नामांकन किया। इसके आलावा दो बार राष्ट्रपति और एक बार उप राष्ट्रपति का नामंकन किया, लेकिन हर बार मामला खारिज हो गया। सबसे खास बात यह है कि जितने भी चुनाव लड़े उनमें से कुछ किन्हीं कमियों के कारण रद्द हो गए, बाकि जो पूरे हुए उनमे से किसी में जमानत तक जब्त हो गई।
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दरअसल राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए सत्ता और विपक्ष की ओर से अभी तक कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया है, लेकिन राष्ट्रपति बनने का सपना देखने वाले ऐसे दो दर्जन धरती पकड़ सरीके उम्मीदवार नामांकन दाखिल करके अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
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बता दें कि लोकसभा सचिवालय के अनुसार अभी तक राष्ट्रपति पद के लिये 17 जुलाई को होने वाले चुनाव के लिए गत 14 जून से नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 28 जुलाई तक चलेगी। अभी तक इस पद के लिए 25 नामांकन पत्र दाखिल किये गये हैं। इन नामांकनों में से कई नामांकन पत्रों को रद्द होना तय माना जा रहा है।
राष्ट्रपति चुनाव के बहाने एकजुट होने की कोशिश में जुटे विपक्ष पर पीएम मोदी का कोविंद दाव भारी पड़ गया है। उनका दांव इतना सटीक बैठा है कि विपक्षी एकती की मुहिम शुरू करने वाले जदयू के मुखिया और बिहार सीएम नीतीश कुमार खुद एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के पक्ष में खड़े हो गए। रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है।