किस्से कहानियां, उपन्यास की दुनिया में अमर किरदार मुंशी प्रेमचंद की जयंती का उल्लास उनके पैतृक गांव वाराणसी के लमही में नजर आया। साहित्य जगत के अमर नायक मुंशी प्रेमचंद की 141वीं जयंती पर लमही भी खिल उठी। हर किसी ने अहसास किया कि सदी बीतने के बाद भी मुंशी जी के कलम का जादू आज भी जिंदा है। प्रेमचंद के किस्से कहानियों का आकर्षण ऐसा है कि लोग बरबस ही जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे।
किसी ने पुष्प अर्पित किया तो किसी ने लमही के लम्हों को अपने कैमरे में सहेजने की कोशिश की। शाम को प्रेमचंद स्मारक व आवास दीपों की रौशनी से जगमग हो उठे। शनिवार को मुंशी प्रेमचंद स्मारक को फूल-मालाओं से सजाया गया। बरसात के बाद भी शहर तथा आसपास के जिलों से आने वालों ने हर किसी को यह अहसास दिलाया कि यह सही है कि वक्त के साथ लोगों को भुला देना आम बात है लेकिन प्रेमचंद के किस्से कहानियों का आकर्षण नहीं टूटने नहीं वाला...। वो कलम जब चली, गरीबों, शोषितों के दर्द को, उनके मन के मर्म को उपन्यास की पंक्तियों में पिरो दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
सुबह 10 बजे स्मारक स्थित मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, प्रो. श्रद्धानंद, ओम धीरज सहित अन्य साहित्यकारों ने माल्यार्पण किया। संस्कृति विभाग द्वारा प्रबुद्ध साहित्यकारों को अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने का सिलसिला आरंभ हो गया। शहर से भी काफी संख्या में लोगों को पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में कार्यक्रम
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मुंशी जी की प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाकर हर किसी ने कथा सम्राट की जन्मस्थली को नमन किया। मुंशीजी के कलम का जादू चार पीढ़ियों से अनवरत कायम है। कोविड संक्रमण के कारण सार्वजनिक आयोजन तो नहीं किए गए थे लेकिन लोग खुद ब खुद लमही पहुंचते रहे और मुंशीजी को श्रद्धासुमन अर्पित करते रहे।
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में कार्यक्रम
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ग्रामीणों का उत्साह भी अपने लाल मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाने में किसी भी तरह से कम नहीं था। लमही ग्राम सभा की ओर से रामलीला मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्राम प्रधान संतोष कुमार सिंह के संयोजन में ग्रामीणों तथा बच्चों की मौजूदगी के बीच केक काटकर जन्मदिन मनाया गया। ग्रामीणों ने मुंशी प्रेमचंद की जयंती और लमही गांव का जन्मदिन भी मनाया। इस अवसर पर प्रदीप गोंड की टीम द्वारा गीत-संगीत व नृत्य का आयोजन किया गया।
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में कार्यक्रम
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 141वीं जयंती पर संस्कृति विभाग की ओर से तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को लमही महोत्सव के दूसरे दिन प्रेमचंद शोध संस्थान में कथा सम्राट की कहानियों पर आधारित नाटक और नौटंकी का मंचन हुआ। कथा सम्राट की रचना देवी पर आधारित नाटक तुलिया मंच पर साकार हुई तो नौटंकी विधा में मंत्र ने दर्शकों के अंतर्मन को झकझोर दिया।
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प्रेमचंद स्मारक व आवास दीपों की रौशनी से जगमग
- फोटो : अमर उजाला
तुलिया नाटक की प्रस्तुति प्रेरणा कला मंच द्वारा रंगश्री मोतीलाल गुप्त के निर्देशन में किया गया जबकि मंत्र का मंचन लोक कला विकास एवं शोध समिति द्वारा नौटंकी शैली में किया गया। प्रेमचंद की कथा दृष्टि विषय पर प्रो. श्रद्धानंद ने प्रेमचंद की कथा दृष्टि को राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तक के रूप में चित्रित करते हुए कहा कि प्रेमचंद का लेखन सही मायने में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सहायक रहा है। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की कथाएं समाज के लिये आईना हैं एवं हाशिये के लोगों का सच प्रस्तुत करती हैं।
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प्रेमचंद स्मारक व आवास दीपों की रौशनी से जगमग
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर संस्कृति विभाग की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सुचरिता गुप्ता ने प्रस्तुति दी। सुचरिता गुप्ता ने गायन की शुरूआत कजरी तरसत जियरा हमार.., बीरन भईया अइले... के बाद पारंपरिक लोक गीत अम्मा मोरे बाबुल को भेजो संदेश की प्रस्तुति दी। इसके बाद रिमझिम बरसे रे बदरिया... के बाद समापन झूला झूले रतिया सारी सखिया...से किया। तबले पर ज्ञानस्वरूप मुखर्जी और हारमोनियम पर मनोहर कृष्ण श्रीवास्तव ने संगत की।
दूसरी प्रस्तुति में नीलम सिंह एवं डॉ. शिवानी शुक्ल ने युगल गायन पेश किया। युगल गायन की शुरूआत मोहन मुरली में मधुमास... के बाद शिव भजन एक आस लगी तुमसे भोले...की मधुर प्रस्तुति दी। इसके बाद प्रभावरंग की और एक रचना बतावा मितवा कहां नाही हौ भोला... और कजरी बदली बाबुल के अगना जइहौ...सुनाया।
काल नायक बनाम खलनायक अंक का लोकार्पण
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कथा सम्राट की 141वीं जयंती पर अखंड भारत पत्रिका के कोरोना काल नायक बनाम खलनायक अंक का लोकार्पण किया गया। पत्रिका के संपादक अरविंद भारत में मुंशी जी की प्रतिमा पर अपनी पत्रिका को समर्पित किया।