गंगा महोत्सव में सहयोगियों के साथ कथक करतीं डॉ. यास्मिन सिंह।
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विदेशों तक पहुंचा शास्त्रीय रसबैंड
काशी रसबैंड विदेशों तक पहुंच गया है। पं. अंशुमान महाराज ने बताया कि शास्त्रीय संगीत को रसबैंड के रूप में ढालकर श्रोताओं को अलग अनुभूति करा रहे हैं। लखनऊ, आगरा संगीत महोत्सव के अलावा देश के अन्य प्रांतों में भी इसकी प्रस्तुति हो चुकी है। जबकि विदेशों में जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, िस्वट्जरलैंड आदि देशों में प्रस्तुति की गई है।
काशी में संगीत साधना सौभाग्य
डॉ. यास्मिन सिंह काशी में संगीत साधना को सौभाग्य बताया। कहा कि एकादशी के दिन कथक से भगवान शिव की आराधना करना, सपने पूरे होने जैसा है। डॉ. यास्मिन संकटमोचन संगीत समारोह, बनारसिया फैस्टिवल, सन् 2012 में गंगा महोत्सव में प्रस्तुति दे चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति का मंच बना महोत्सव
राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि गंगा महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच बन चुका है। लोग इसका इंतजार करते हैं। कहा कि गंगा की लहरें खुद संगीत है। वाद्य, नृत्य एवं नाट्य इन्हीं से प्रवाहमान होती हैं। गंगा मानव सभ्यता की जीवन रेखा है।