गर्मी से निजात पाने व इंद्रदेव को खुश करने के लिए बुधवार को वाराणसी के तुलसी घाट पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर शहनाई बजाई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
राग मेघ की प्रस्तुति के साथ ‘...बरसो बरसो रे काली बदरिया’, ‘...झिमिर झिमिर बरसो इंद्र काशी नगरिया’ गीत पर शहनाई की धुन बजाई। इससे पहले महेंद्र प्रसन्ना व सहयोगी कलाकारों ने बाबा विश्वनाथ को नमन करते हुए मां गंगा का पंडोपचार व षोड्सोपचार सविधि पूजन अर्चन किया।
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साथ ही मां गंगा का 11 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक कर पुष्प, फल व मिष्ठान अर्पित किया गया। इंद्रदेव को नारियल बलि दी गई। इस मौके पर सहयोगी कलाकारों में शहनाई पर गणेश जी व संत राम, दुक्कड़ पर कन्हैया लाल, ढोलक पर प्रेमचंद्र, झांझ पर प्रभात प्रसन्ना व संगत कलाकार के तौर सुरेश कुमार शामिल रहे।
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गर्मी से निजात पाने व इंद्रदेव को खुश करने के लिए बुधवार को वाराणसी के तुलसी घाट पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर शहनाई बजाई।
गर्मी से निजात पाने व इंद्रदेव को खुश करने के लिए बुधवार को वाराणसी के तुलसी घाट पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य शहनाई वादक पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर शहनाई बजाई।