अपनी बहादुरी से अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ाने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की 124वीं जयंती पर पूरा देश नमन कर रहा है। आज ही के दिन आज ही के दिन साल 1897 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में उनका जन्म हुआ था।
अपनी बहादुरी से अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ाने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की 124वीं जयंती पर पूरा देश नमन कर रहा है। आज ही के दिन आज ही के दिन साल 1897 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में उनका जन्म हुआ था। आजादी से 50 साल पहले जन्म लेने वाले बिस्मिल ही काकोरी कांड के हीरो थे। काकोरी कांड का पूरा ब्लूप्रिंट बनारस में ही एक ठंडाई की दुकान पर तैयार किया गया था।
बच्चन सिंह की किताब फांसी से पूर्व में इस बात का उल्लेख मिलता है कि काकोरी कांड से पहले रिहर्सल के लिए शचींद्र नाथ सान्याल ने वाराणसी के भीड़-भाड़ वाले इलाके में कचहरी के पास ट्रेजरी लूटने का प्लान बनाया था। काशी और देश के क्रांतिकारियों पर शोध कर रहे नित्यानंद राय ने बताया कि काकोरी कांड का ब्लूप्रिंट बनारस में ठंडाई की एक दुकान पर तैयार किया गया था। चंद्रशेखर आजाद और लाहिड़ी के साथ मिलकर सान्याल ने योजना बनाई थी।
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काकोरी कांड
- फोटो : self
काशी तो हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी का हेडक्वाटर ही था लेकिन रामप्रसाद बिस्मिल की सक्रियता से उनका शहर शाहजहांपुर भी उन दिनों क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र बन गया था। बिस्मिल की योजना थी कि हर जिले में पुस्तकालय, क्लब, सेवा समितियां खोली जाएं ताकि दल का आधार निर्मित हो सके।
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मुस्तफा कमाल पाशा, राम प्रसाद बिस्मिल
वैचारिक क्रांति के लिये साप्ताहिक पत्र निकालने की भी योजना भी बिस्मिल के जेहन में थी इसके लिये वे चाहते थे कि दल के पास अपना निजी प्रेस हो जिससे प्रचार का कार्य करने में कोई अड़चन न आए। इन सब कामों के लिये धन की आवश्यकता थी। दल के सदस्य धनी सेठ साहूकारों (जो अंग्रेजों के पिट्ठू थे) के घरों में डकैतियां डालते थे
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काकोरी कांड
- फोटो : amar ujala
काकोरी कांड के डेढ़ महीने बाद पूरे उत्तर भारत में एक साथ छापे पड़ने लगे। बनारस, शाहजहांपुर, इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ आदि शहरों से 40 क्रांतिकारी पकड़ लिए गए। दल के लीडर रामप्रसाद बिस्मिल की गिरफ्तारी शाहजहांपुर में उनके मकान से हुई। मन्मथनाथ गुप्त बनारस के मकान से अल सुबह धर लिए गए। एक साथ हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के प्रेमकिशन खन्ना, इन्द्रभूषण मित्र, हरगोविन्द, बनारसी लाल, ठाकुर रोशन सिंह, विष्णुशरण, रामदुलारे समेत एक ही दिन दल के नौ रत्न गिरफ्तार हो गए। चंद्रशेखर आजाद बनारस से चुपचाप झांसी निकल गए, अशफाक ने गन्ने के खेत में अपने को छुपा लिया।
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने एक माउजर तीन सौ रुपये में खरीदी थी। यह पैसा उन्होंने पुस्तक बेच कर बचाया था। इतिहास में ऐसा उदाहरण दूसरा नहीं मिलता जब किसी क्रांतिकारी ने अपनी स्वलिखित किताबों को बेचकर पिस्तौल खरीदी हो।