स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में विहंगम योग संत समाज के 93 वें वार्षिकोत्सव समारोह के दूसरे दिन सोमवार को 5101 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ में डेढ़ लाख से अधिक अनुयायियों ने आहुति दी।
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पांच किमी परिधि में फैली आहूति की सुगंध
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विज्ञान देव महाराज ने यज्ञ के महत्व पर रोशनी डाली।
- फोटो : अमर उजाला
महायज्ञ में आहुति के दौरान विज्ञान देव महाराज ने यज्ञ के महत्व पर रोशनी डाली। बताया कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण और वैदिक धर्म का सार है। यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म है। इसलिए यज्ञ को सिर्फ कर्मकांड ही न समझा जाए।
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महायज्ञ में पूजा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
इंडोनेशिया से आए म्यूजिकल ग्रुप की ओर से विहंगम योग के भजनों की मोहक प्रस्तुति की गई। आकर्षक ढंग से सजी 5101 कुंडीय यज्ञ वेदियों में वैदिक मंत्रों की ध्वनि से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा।
21000 दंपतियों ने कुंड में आहुति दी
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देश विदेश के श्रद्धालुओं ने दी आहूति
- फोटो : अमर उजाला
विश्व शांति वैदिक महायज्ञ में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के अलावा अमेरिका, जर्मनी, मारीशस, दुबई, नेपाल, आस्ट्रेलिया, साऊथ अफ्रीका समेत कई देशों से आए 21000 दंपतियों ने भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के निमित्त यज्ञ कुंड में आहुति दी।
यज्ञ के उपरांत मानव मन की शांति और आध्यात्मिक उत्थान के निमित्त ब्रह्मविद्या विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा नए जिज्ञासुओं को दी गई। इसमें करीब सात हजार नए जिज्ञासुओं ने ब्रह्मविद्या विहंगम योग की दीक्षा ली।