नया साल आने में मात्र दो दिन बाकी रहे गए हैं। वाराणसी शहर के फाइव स्टार होटल हो या गेस्ट हाउस सभी में न्यू इयर सेलिब्रेशन की तैयारियां शुरू हो गई हैँ। बनारस के होटलों ने अपने मेहमानों की न्यू ईयर की मस्ती के लिए खास आयोजन किए हैं। बनारस के अलावा शहर के बाहरी इलाकों में भी तैयारियां की गई हैं। अागे की स्लाइड्स में देखें...
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new year party
- फोटो : अमर उजाला
शहर के जहां प्रमुख होटलों ने अपने यहां ठहरे पर्यटकों के लिए नृत्य और खान-पान के इंतजाम शुरू कर दिए हैं तो कुछ ऐसे भी होटल व गेस्ट हाउस हैं जहां लोग एक निश्चित शुल्क अदा कर मस्ती और धमाल के बीच नए साल का स्वागत कर सकेंगे। होटल ताज, रेडिसन और क्लार्क अपने यहां ठहरे लोगों के लिए इंडियन, इटैलियन, कांटिनेंटल, फ्यूजन, ओरिएंटल, मैक्सिकन आदि खानपान के तमाम विकल्प उपलब्ध कराएगा। वहीं कहीं-कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
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hotel taj
होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल हमेशा की तरह एक बार फिर नए वर्ष की पूर्व संध्या पर ‘ब्लू मून नाइट’ का आयोजन करने जा रहा है। जनरल मैनेजर आरएस सिंह ने बताया कि इस मौके पर खानपान की 150 से ज्यादा वेरायटी होंगी। इसके अलावा यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ डीजे नाइट भी होगा। रंगारंग कार्यक्रम के दौरान पुरस्कारों का भी वितरण किया जाएगा। इसमें कई प्रतियोगिताएं जैसे कि मल्लिका ऑफ नाईट, बेस्ट ड्रेस्ड कपल, बेस्ट डांसिंग कपल का आयोजन किया गया है।
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hotel raddison
इस दौरान शेफ जोशेफ गोम्स व एफएनबी मैनेजर धरमेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर होटल रामाडा और सूर्या होटल में नए वर्ष का जोरदार स्वागत करने की तैयारी चल रही है। इसमें शहर के प्रमुख लोग भी अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे। शहर के लगभग 350 छोटे-बड़े होटलों में नए वर्ष की तैयारियां चल रही है।
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चुनार का किला
- फोटो : facebook
वाराणसी से 40 किमी दूर स्थित चुनार में धर्म, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम है। गंगा के किनारे विंध्य शृंखला पर बसे जंगल में यादगार ट्रैकिंग की जा सकती है। चुनार का किला अपने आप में हजारों साल पुराना इतिहास छिपाए है। पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा खोह मंदिर प्राकृतिक रॉक शेल्टर का बेहतरीन नमूना है। इसकी दीवारों पर दुर्लभ आकृतियां और चित्र उकेरे हुए हैं। यहां से करीब 20 किमी दूर सिद्धनाथ दरी और शक्तेशगढ़ में स्वामी अड़गड़ानंद का सुरम्य आश्रम है।
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मां विंध्यवासिनी
- फोटो : mirzapur
विंध्य पर्वत शृंखला के बीच मिर्जापुर के पास गंगा किनारे स्थित यह तीर्थ देश-दुनिया में विख्यात है। देवी विंध्यवासिनी की शक्तिपीठ लाखों लोगों को हर साल आकर्षित करती है। इसके आसपास अष्टभुजा मां का मंदिर और कालीखोह मंदिर जैसे कई प्रमुख तीर्थस्थल हैं जहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। साल के पहले दिन भी हजारों लोग माता के दर्शन को जाते हैं।
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vijay garh fort
यह जिला पर्यटन स्थलों की खान है। यहां शिव द्वार और रेणुकेश्वर मंदिर के आसपास महाभारत कालीन की मूर्तियां हैं। विजयगढ़ किले के दरकते पत्थर भी यहां का गौरवशाली अतीत बयां करते हैं। सलखन स्थित फॉसिल्स पार्क अपने आप में खास है। जंगल और प्राचीन भित्तिचित्रों के लिए भी यह जिला मशहूर है। प्रकृति से प्रेम करने वालों के लिए लखनिया और मुक्खा प्रपात आकर्षक स्थल है।
चंदौली जिले के दक्षिणांचल में चकिया-नौगढ़ मार्ग के मध्य और चंद्रप्रभा की सुरम्यवादियों में स्थित राजदरी-देवदरी जलप्रपात देशी-विदेशी पर्यटकों को नए साल का जश्न मनाने के लिए मुफीद जगह है। यह पक्षियों की चहचहाट और वन्य जीवों के पदचापों से हमेशा गुलजार रहता है। यहां बड़े-बड़े चट्टानों से टकराते हुए सैकड़ों फीट की ऊंचाई से गिरता चंद्रप्रभा का पानी आंखों को अलग ही सुकून देता है।