श्रद्धालुओं को जल पिलाते समाजसेवी।
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महज दो मिनट में कुंड में डुबकी लगाकर वस्त्र, अन्न और आभूषण का त्याग करके दूसरे रास्ते से दंपती बाहर गलियों से निकलते रहे। दोपहर दो बजे तक श्रद्धालुओं का आंकड़ा दो लाख को पार कर गया था लेकिन कतार कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी, जितने लोग स्नान करके निकल रहे थे उससे अधिक लोग कतार में आकर लग रहे थे। पूरा कुंड सब्जी, फल और कपड़ों से भर गया था।