संकटों के दौर से गुजर रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के गुरु उनसे इतने नाराज हो गए थे कि उन्हें श्राप दे दिया था कि तुझे घमंड है और तू मिट्टी में मिल जाएगा। आगे की स्लाइड में जानें कौन थे लालू के गुरु और क्यों दिया था श्राप...
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- फोटो : अमर उजाला
अपने अटपटे स्वभाव के लिए मशहूर यूपी के मिर्जापुर जिले के अघोरी तांत्रिक विभूति नारायण उर्फ पगला बाबा राजद सुप्रीमो लालू यादव समेत कई हाई प्रोफाइल लोगों के गुरु थे। वह विन्ध्याचल के तुलसी तलिया नामक स्थान पर वर्षों से अपना आश्रम बनाकर रहते थे। हाल ही में उनका निधन हुआ है।
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वर्ष 2013 में लालू यादव के आश्रम आगमन के पश्चात वे काफी चर्चा में आ गए थे। लालू यादव ने पगला बाबा को भगवान शिव का अवतार बताया था। सुप्रीम कोर्ट से राहत पाकर लालू प्रसाद यादव ने अपने तांत्रिक गुरू पगला बाबा के विन्ध्याचल आश्रम में करीब तीन घंटों तक तंत्र पूजा का अनुष्ठान किया था।
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लालू ने कहा था कि बाबाजी ने बचपन में मेरे जीवन की रक्षा तब की थी जब परिजनों और डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी। पूजा के दौरान ही लालू ने फोन से अपनी पत्नी राबड़ी देवी से बाबा की बात करा कर आशीर्वाद भी दिलवाया था। अनुष्ठान के बाद पगला बाबा ने बताया था कि लालू यादव उनके प्रिय शिष्यों में से हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया था कि लालू यादव के लिए विशेष अनुष्ठान किया गया। तंत्र साधना अगर अच्छे कार्यों के लिए सच्चे मन से किया जाये तो इच्छा जरुर पूरी होती है। पगला बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि लालू प्रसाद यादव एक बार फिर से राजनीति के शिखर पर नजर आयेंगे। बाबा से आर्शीवाद लेने के बाद लालू यादव की पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया।
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बिहार में महागठबंधन की शानदार जीत हुई और तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बने। लालू ने वादा किया था कि यदि उनके अच्छे दिन वापस आएंगे तो वह बाबा का आशीर्वाद लेने आएंगे। साथ ही आश्रम में एक एंबुलेंस देंगे और यहां की सड़कों को ठीक कराएंगे। चुनाव जीतने के बाद लालू यादव कभी आश्रम वापस नहीं आए और एक भी वादा पूरा नहीं किया।
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इससे नाराज पगला बाबा ने उन्हें श्राप दिया था कि तुझे घमंड हो गया है। तू जल्दी ही मिट्टी में मिल जाएगा। हुआ भी वही। लालू फिर से अर्श से फर्श पर पहुंच गए। अघोरी तांत्रिक पगला बाबा के बारे में कई रहस्मयी बातें प्रचलित थीं। पगला बाबा तंत्र साधक थे। वह अटपटे कार्यो के लिए मशहूर थे। उनके बारे में कहा जाता था कि वह किसी की नहीं सुनते थे। भक्तों के दुःख गाली देकर और उनको डंडे से पीटकर भगाते थे। पर उनका डंडा खाने के लिए लोग लालायित रहते थे।
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- फोटो : अमर उजाला
उनसे मिलना लोगों के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। कई घंटे इंतजार करने के बाद लोग उनसे मिल पाते थे। बाबा इस तरीके का व्यवहार जानबूझकर करते थे ताकि उनके पास कम लोग आएं और उनकी साधना में व्यवधान उत्पन्न न हो। इन्ही आचरणों के कारण उन्हें पगलाबाबा कहा जाने लगा । वे जानवरों से बहुत प्यार करते थे । पगला बाबा अपने पास सदैव दो चार भेड़ , कुत्ते इत्यादि रखते थे और उनकी देखभाल स्वयं किया करते थे ।
इतना ही नहीं उनका भोजन भी अपने हाथों से ही बनाते थे । उनको खिलाने के पश्चात ही अपनी पेट पूजा करते थे। उनके शिष्यों की माने तो उनकी अवस्था लगभग साढ़े चार सौ साल की थी । उनके करीबी भक्त कहते है कि जैसे ही उनको याद करते थे भले ही हजार किलोमीटर दूर ही क्यों न हो, बाबा के प्रत्यक्ष दर्शन हो जाते थे।