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डंडे से मारकर दुःख दूर करते थे लालू के गुरु पगला बाबा, जानें रहस्यमयी बातें

Sat, 15 Apr 2017 10:48 AM IST
amarujala.com- Written by: हनी मिश्रा
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lalu yadav pagala baba - फोटो : अमर उजाला
अपने अटपटे स्वभाव के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अघोरी तांत्रिक पगला बाबा का गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे निधन हो गया। पगला बाबा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव समेत कई हाई प्रोफाइल लोगों के गुरु थे। आगे की स्लाइड में जानें पगला बाबा की कई रहस्यमयी बातें-
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lalu yadav pagala baba - फोटो : अमर उजाला
विन्ध्याचल के तुलसी तलिया नामक स्थान पर वर्षों से अपना आश्रम बनाकर रह रहे अघोरी साधक बिभूति नारायण उर्फ पगला बाबा का निर्वाण गुरुवार दोपहर इसी आश्रम में हुआ। अपने तीखे तेवरों और अटपटे बोल के लिए विख्यात असोम नरेश पगलाबाबा के पास काफी प्रभावशाली लोगों का आना जाना लगा रहता था ।
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pagala baba - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2013 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के आगमन के पश्चात वे काफी चर्चा में आ गए थे। लालू यादव ने पगला बाबा को भगवान शिव का अवतार बताया था। सुप्रीम प्रीम कोर्ट से राहत पाकर लालू प्रसाद यादव ने अपने तांत्रिक गुरू पगला बाबा के विन्ध्याचल आश्रम में करीब तीन घंटों तक तंत्र पूजा का अनुष्ठान किया था।

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pagala baba - फोटो : अमर उजाला
लालू ने कहा था कि बाबाजी ने बचपन में मेरे जीवन की रक्षा तब की थी जब परिजनों और डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी। पूजा के दौरान ही लालू ने फोन से अपनी पत्नी राबड़ी देवी से बाबा की बात करा कर आशीर्वाद भी दिलवाया था। अनुष्ठान के बाद पगला बाबा ने बताया था कि लालू यादव उनके प्रिय शिष्यों में से हैं।
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pagala baba - फोटो : pagala baba
उन्होंने कहा कि लालू यादव के लिए विशेष अनुष्ठान किया गया । तंत्र साधना अगर अच्छे कार्यों के लिए सच्चे मन से किया जाये तो इच्‍छा जरुर पूरी होती है। पगला बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि लालू प्रसाद यादव एक बार फिर से राजनीति के शिखर पर नजर आयेंगे। बाबा से आर्शीवाद लेने के बाद लालू यादव की पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया।
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pagala baba - फोटो : अमर उजाला
पगला बाबा तंत्र साधक थे। वह अटपटे कार्यो के लिए मशहूर थे। उनके बारे में कहा जाता था कि वह किसी की नहीं सुनते थे। भक्तों के दुःख गाली देकर और उनको डंडे से पीटकर भगाते थे। पर उनका डंडा खाने के लिए लोग लालायित रहते थे। उनसे मिलना लोगों के लिए टेढ़ी खीर साबित होती है। कई घंटे इंतजार करने के बाद लोग उनसे मिल पाते थे।
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pagala baba - फोटो : अमर उजाला
बाबा इस तरीके का व्यवहार जानबूझ कर इसलिए करते थे की उनके पास कम लोग आए जिससे उनकी साधना में व्यवधान उतपन्न न हो । इन्ही आचरणों के कारण उन्हें पगलाबाबा कहा जाने लगा । वे जानवरों से बहुत प्यार करते थे । पगला बाबा अपने पास सदैव दो चार भेड़ , कुत्ते इत्यादि रखते थे और उनकी देखभाल स्वयं किया करते थे ।
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pagala baba - फोटो : अमर उजाला
इतना ही नहीं उनका भोजन भी अपने हाथों से ही बनाते थे । उनको खिलाने के पश्चात ही अपनी पेट पूजा करते थे। उनके शिष्यों की माने तो उनकी अवस्था लगभग साढ़े चार सौ साल की थी । उनके करीबी भक्त कहते है कि जैसे ही उनको याद करते थे भले ही हजार किलोमीटर दूर ही क्यों न हो, बाबा के प्रत्यक्ष दर्शन हो जाते थे।
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