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करवा चौथ पर चक्रवात अर्नब का पहरा: बादलों में छिपा चांद, मोबाइल बना सहारा; वाराणसी में ऐसे हुआ पूजन

Thu, 29 Oct 2026 10:42 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

करवा चौथ पर चांद की लुकाछिपी के बीच सुहागिनों ने लंबे इंतजार के बाद चलनी से चंद्रमा का दीदार किया। 14 घंटे का निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य दिया और पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य की कामना की। इस दौरान सिंधी, पंजाबी और मारवाड़ी परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन किया गया।
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मोबाइल में चांद का दीदार करती व्रती महिला। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में करवा चौथ पर मौसम ने चांद के दीदार में बाधा डाली। बादलों के कारण चंद्रमा के नजर नहीं आने पर कई सुहागिनों ने मोबाइल पर चांद की तस्वीर देखकर पूजन किया। 14 घंटे का व्रत रखने के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की।

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पूजन के लिए तैयार महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
बादलों की लुकाछिपी के बीच बृहस्पतिवार को चांद के दीदार के लिए सुहागिनों को लंबा इंतजार करना पड़ा। करीब 14 घंटे का व्रत रखने के बाद महिलाओं ने चलनी की ओट से चंद्रमा और अपने सुहाग का दीदार किया। चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना की। 
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थाली में पूजन सामग्री रखकर चांद का दीदार। - फोटो : अमर उजाला
सरस्वती, हंस पंचमहापुरुष और बुधादित्य समेत सात महायोगों में महिलाओं ने करवा चौथ का पूजन किया। घरों से लेकर मंदिरों, कॉलोनियों और अपार्टमेंट तक सामूहिक पूजन के आयोजन हुए। सिंधी, पंजाबी और मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार पर्व मनाया।

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पूजन के लिए घेरे में बैठी महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
अखंड सौभाग्य और पति की मंगलकामना के लिए सुहागिनों ने सुबह स्नान के बाद जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प लिया। सरगी ग्रहण कर व्रत की शुरुआत हुई। दिनभर महिलाएं पूजन की तैयारियों में जुटी रहीं। कोई पूजा सामग्री जुटाने में लगी थी तो कोई हाथों में मेहंदी रचा रही थी। चक्रवाती तूफान के असर से दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और बूंदाबांदी होती रही। 
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करवा चौथ की आकर्षक तस्वीरें। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
शाम ढलते ही महिलाओं की निगाहें चांद पर टिक गईं, लेकिन बादलों के कारण चंद्रमा के दर्शन में देरी हुई। चंद्रोदय के निर्धारित समय के अनुसार रात 7:57 बजे के आसपास चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा की परंपरा निभाई गई। महिलाओं ने चलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखा। चौथ माता की कथा सुनी और मिठाई का भोग लगाकर करवा फेरने की रस्म निभाई। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया।
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पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
सिंधी, पंजाबी और मारवाड़ी बहुल कॉलोनियों व अपार्टमेंट्स में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। कई महिलाओं ने दक्षिणेश्वरी काली मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, जागेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव और गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
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करवा चौथ का पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
सास-ससुर से लिया आशीर्वाद, उपहार में मिले सोने-चांदी के आभूषण
सिंधी और पंजाबी समाज में करवा चौथ की रस्में पारंपरिक उल्लास के साथ निभाई गईं। महिलाओं ने पति की दीर्घायु की कामना के साथ सरगी ग्रहण कर व्रत शुरू किया। घर के बड़ों ने सरगी के साथ सोने की नथिया, चांदी की पायल और अन्य उपहार दिए। फल, मेवा और सेवई आदि ग्रहण करने के बाद महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा।
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करवा चौथ के पूजन से पहले चांद को ढू्ंढती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
सिंधी समाज की पूजा ने बताया कि रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद विधि-विधान से पूजा की। खत्री समाज की जया कपूर ने बताया कि सामूहिक पूजा के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे से सुहाग की थाली बदली और सास-ससुर का आशीर्वाद लिया। इसके बाद मठरी का प्रसाद वितरित किया गया। स्मृता लोहिया ने बताया कि चंद्रमा के साथ गौरा का पूजन करने के बाद सभी ने विविध पकवानों का आनंद लिया।
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