सांप्रदायिकता के खिलाफ कन्याकुमारी से निकली AISF और AIYF की 'बचाओ भारत, बदलो भारत' यात्रा रविवार को पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंची। इस यात्रा के साथ जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी आना था लेकिन वो नहीं पहुंचे। आगे की स्लाइड्स में जानिए कारण..
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यात्रा कन्याकुमारी से 11 जुलाई को आरंभ हुई थी। वाराणसी पहुंचने पर वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने युवाओं से वादा किया था कि प्रतिवर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया कराएंगे परंतु पिछले तीन वर्षों में दो लाख रोजगार भी सृजित नहीं हुए। बेरोजगारी की समस्या देश में बढ़ती जा रही है और देश के प्रधान मंत्री को विदेश यात्राओं से फुरसत नहीं मिल रही।
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चौबेपुर में यात्रा का स्वागत करते हुए एटक के प्रदेश सचिव अजय मुखर्जी ने आरोप लगाया कि यात्रा के साथ जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी आना था लेकिन वाराणसी प्रशासन ने न अनुमति दी और न सुरक्षा मुहैया कराई। उनका कहना था कि बचाओ भारत, बदलो भारत यात्रा के यहां पहुंचने से पहले प्रशासन से अनुमति मांगने का प्रयास किया गया था लेकिन प्रशासन ने आवेदन पत्र लेने से ही इंकार कर दिया।
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जेएनयू के छात्र संघ नेता कन्हैया कुमार
उन्होंने बताया कि गाजीपुर में कुछ उपद्रवियों ने यात्रा बस पर पथराव कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे यात्रा में शामिल युवाओं को दूसरे वाहनों से बनारस आना पड़ा। वहां भी प्रशासन ने कोई सुरक्षा नहीं दी। उधर, कन्हैया कुमार को अनुमति न मिलने के बारे में एडीएम सिटी वीरेंद्र पांडेय ने बताया कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
यात्रा के वाराणसी पहुंचने के बाद पांडेयपुर में मुंशी प्रेमचंद, कचहरी स्थित अंबेडर प्रतिमा और लहुराबीर स्थित आजाद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। लहुराबीर स्थित आजाद पार्क में पूर्व विधायक अजय राय सहित अन्य लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। यह यात्रा 12 सितंबर को हुसैनीवाला पंजाब पहुंचेगी।