होली का खुमार सिर चढ़कर बोलने लगा है। रंगभरी एकादशी के बाद मशाने की होली खेलकर अब काशी रंगों की होली की तैयारियों में जुट गई है। सोमवार शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा। जिले भर में 22 सौ से ज्यादा जगहों पर होलिका सजाई गई हैं।
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होलिकाओं में इस बार काफी विविधताएं नजर आ रही हैं। कहीं गोबर के उपलों तो कहीं सूखी लकड़ी की होलिका सजाई गई हैं। रविवार को होलिका दहन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
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पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से शहर में कई जगह गोबर के उपलों पर होलिका सजाई गई है। भक्त प्रह्लाद व होलिका की आकर्षक मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। शहर में 1077 होलिका सजाई गई हैं। सोमवार शाम होलिका की बरात निकलेगी। जैतपुरा से निकलने वाली बारात की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पुराणों के अनुसार, होलिका दहन में गाय के गोबर से बने उपले और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए, क्योंकि धार्मिक दृष्टि से पेड़ों पर किसी न किसी देवता का वास होता है। इसीलिए शास्त्रों में पेड़ों की पूजा का भी विधान है।