पुनः आने पर मैंने मंत्र दीक्षा ग्रहण करने का अनुरोध किया और गुरूजी ने आशीर्वाद दिया। मैं अपने को बहुत ऊर्जावान और शक्ति से भरा महसूस कर रहा हूं। दीक्षा का प्रारंभ गणेश-अंबिका, सप्त घृत मातृका और नवग्रह पूजन से प्रारंभ हुआ। गुरुपूजन, मंत्र दीक्षा और हवन की पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुई और पौरोहित्य कार्य पं शम्भुनाथ पांडेय ने करवाया।