यूपी के आजमगढ़ में बीते सोमवार को हुए एनकाउंटर में 50 हजार के ईनामी बदमाश राकेश पासी के मारे जाने के बाद गिरोह की कमर ही टूट गई। पुलिस ने अब तक गिरोह के चार सदस्यों को मार गिराया। गिरोह का सक्रिय सदस्य राकेश बीते वर्ष अक्तूबर माह में एक सर्राफ के यहां दिनदहाड़े हुई लूट की घटना में शामिल रहा। इसके बाद उस पर पहली बार इनाम घोषित किया गया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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बदमाश राकेश पासी
- फोटो : file photo
गाजीपुर जिले के भुड़कुड़ा थाने के सतरजहांपुर गांव निवासी मनोज वर्मा की तरवां थाने के नरायनपुर कंचनपुर बाजार में सराफा की दुकान थी। 25 अक्तूबर 2017 की दोपहर एक बाइक पर सवार तीन बदमाश पहुंचे। दुकान में घुसकर दो बदमाशों ने मनोज के कनपटी पर तमंचा सटाकर एक लाख रुपये और सात लाख का आभूषण लूटकर भाग निकले। जांच में इस घटना में पासी गैंग के राकेश पासी, रामजी पासी, जयहिंद यादव, रामप्रवेश यादव आदि का नाम सामने आया।
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मोहन पासी
- फोटो : SELF
इस घटना के बाद राकेश सहित अन्य आरोपियों पर पहले पांच हजार बाद में 15 हजार का इनाम घोषित किया गया। इनमें से जयहिंद, रामजी को पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है। रामप्रवेश जेल में है। जबकि राकेश लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहा था। 14 सितंबर को मुठभेड़ में रामजी ढेर हुआ जबकि राकेश फरार हो गया। इसके बाद डीआईजी ने उसका इनाम राशि बढ़ाकर 50 कर दिया। जिसे एक लाख करने के लिए डीजीपी को रिपोर्ट भेजी गई थी। हालांकि उससे पहले ही वह मारा गया।
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मोहन पासी
- फोटो : file photo
बता दें कि तीन लोगों की एक साथ हत्या करने का अभियुक्त पासी गैंग का सरगना श्यामबाबू पासी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। जेल के भीतर से ही श्यामबाबू रंगदारी के लिए लोगों को फोन करता था। ना देने वाले के यहां राकेश पासी फायर कर दहशत फैलाता था। इनके भय से जहानागंज, मेंहनगर, तरवां क्षेत्र के कई रसूखदारों ने इलाका छोड़ दिया था।
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मुठभेड़ में मारा गया जयहिंद यादव
- फोटो : अमर उजाला
श्यामबाबू के उत्पात मचाने का ही परिणाम रहा कि एक वर्ष के भीतर गिरोह के तीन शार्प शूटर मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए। जिससे गैंग की कमर टूट गई। घटनाओं पर गौर करें तो वर्ष 2012 में श्यामबाबू पासी जिले के पुरानी जेल में था। यहीं से वह जहानागंज, मेंहनगर, तरवां और शहर कोतवाली के रहने वाले दो दर्जन से अधिक बड़े व्यापारियों, ईट-भट्ठा व्यवसाई और कॉलेज प्रबंधकों से रंगदारी मांगी। ना देने पर उनके घर हवाई फायरिंग करवाई।
पुलिस के असफल रहने पर कई लोग ने श्यामबाबू को रुपए पहुंचा दिए, जबकि कई लोग काफी दिनों तक भूमिगत रहे। बाद में इलाका छोड़ना ही बेहतर समझा। तभी से जिले में पासी गिरोह हावी रहा। दो वर्ष पूर्व एसटीएफ ने गोरखपुर में डी-9 के सरगना धर्मेंद्र सिंह को ढेर कर दिया। धर्मेंद्र की मौत के बाद उसके गिरोह के कई सदस्य पासी गिरोह में शामिल हो गए। इधर पुलिस ने कुछ दिनों के अंदर पासी गिरोह के जयहिंद यादव, रामजी पासी, मोहन पासी और अब राकेश पासी को ढेर कर दिया।