भारतीयों ने अपनी काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया है। दुनिया की कई दिग्गज कंपनियों में भारतीयों ने टॉप का पद हासिल किया है। इनमें गूगल के सीईओ सुंदर पिच्चई, माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सीईओ सत्या नडेला जैसे लोगों का शामिल है। इस कड़ी में एक और नाम जुड़ा है निकेश अरोड़ा का जो बीएचयू आईआईटी के पूर्व छात्र हैं। ये इन दिनों इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि जिस कंपनी के ये सीईओ बने है वहां उन्हें दुनिया भर में सबसे अधिक सैलरी मिलने जा रहा है। आगे की स्लाइड्स में जानिए..
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nikesh arora
- फोटो : twitter
बीएचयू आईआईटी (तब बीएचयू आईटी) से पासआउट छात्र को अमेरिका में 858 करोड़ की पैकेज का जॉब ऑफर मिला है। चर्चित सॉफ्टबैंक के सीओओ के रूप कार्य कर चुके दिल्ली से सटे गाजियाबाद निवासी निकेश अरोड़ा को सिलिकॉन वैली स्थित साइबर सुरक्षा की दिग्गज कंपनी पालो आल्टो नेटवर्क के सीईओ की जिम्मेदारी मिली है। ये पद संभालते ही वो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा सैलरी पाने वालों में से एक बन जायेंगे। यह कंपनी उन्हें सालाना 128 मिलियन डॉलर यानी करीब 858 करोड़ रुपए वेतन देगी।
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nikesh arora
यूपी के गाजियाबाद निवासी निकेश अरोड़ा के पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी थे। उन्होंने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में एयरफोर्स के ही स्कूल से की थी। इसके बाद उन्होंने 1989 में बीएचयू आईटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। फिर विप्रो में नौकरी शुरू की, लेकिन जल्द ही छोड़ दी और आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। उन्होंने बोस्टन की नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। 1992 में उन्होंने पहली नौकरी ज्वाइन किया।
लेकिन, पढाई नहीं छोड़ी।
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उन्होंने बोस्टन कॉलेज में फाइनेंशियल प्रोग्राम की पढ़ाई शुरू की, जहां वे रात में क्लास करते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और वे क्लास में टॉप कर गए। इसके साथ ही 1995 में अरोड़ा ने चार्टर्ड फाइनेंशियल एनलिस्ट की पढ़ाई पूरी कर ली। निकेश की कामयाबी की शुरुआत गूगल से हुई। 2004 से 2007 तक निकेश, गूगल के यूरोप ऑपरेशन हेड थे। इसके बाद 2011 में निकेश गूगल के चीफ बिजनेस ऑफिसर बन गए। इस दौरान निकेश गूगल में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वालों में शामिल हो गए।
2014 में निकेश ने गूगल छोड़ सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉरपोरेशन ज्वाइन कर लिया। यहां निकेश को ग्लोबल इंटरनेट इनवेस्टमेंट प्रमुख की जिम्मेदारी मिली। इधर, बीएचयू के पूर्व छात्र की इस उपलब्धि पर बीएचयू के छात्र और शिक्षक फूले नहीं समा रहे। बीएचयू विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें बधाई भेजी है।