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Flood in Varanasi: इस दर्द का अंत नहीं...हालात के आगे लाचार बने बाढ़ पीड़ित, बनारस को सताने लगा 1978 का डर

Tue, 30 Aug 2022 05:18 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
शिव की नगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप जारी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर की वजह से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ित हालातों के आगे लाचार हैं। पानी ज्यों-ज्यों बढ़ रहा है लोग घर खाली कर रहे है। बाढ़ राहत शिविर में रह रहे लोगों को वर्तमान के साथ ही भविष्य की चिंता उन्हें घेरते जा रही है। खतरे के निशान को पार करने के बावजूद जलस्तर में बढ़त लगातार जारी है। धीरे-धीरे बढ़ाव के कारण जलस्तर वर्ष 2013 के रिकॉर्ड 72.630 मीटर के करीब पहुंच रहा है। रविवार शाम ही बाढ़ का पानी काशी विश्वनाथ धाम की दहलीज तक पहुंच गया है। धाम से सटे मणिकर्णिका घाट को डूबोकर अब ऊपर घुसने लगा है।

गंगा का पानी अब घाट की सीढ़ियों से ऊपर आकर सड़कों पर बहने लगा है। गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा के तटवर्ती इलाके तो पहले से ही डूबे थे। अब पानी नए इलाकों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बड़े-बुजुर्ग 1978 में आई बाढ़ याद कर सहम जा रहे हैं। उन्हें आशंका है कि जिस रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, कहीं वाराणसी में 1978 वाले हालात ना हो जाए।
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में घुसा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में गंगा में बाढ़ का रिकॉर्ड 1978 का है। तब गंगा का जलस्तर 73.901 मीटर तक पहुंचा था। ऐसे में अब लोग सशंकित हैं कि कहीं वो स्थिति न आ जाए। वैसे अभी ही गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों के मोहल्लें और कॉलोनियों के मकान बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। लोगों का पलायन लगातार जारी है। 
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अस्थायी टेंट में रह रहे बाढ़ पीड़ित - फोटो : अमर उजाला
पैरों से लाचार सारनाथ क्षेत्र के दानियालपुर के जमाल अहमद और शहनाज बानो कभी बाढ़ में डूबे अपने करघा को देखते हैं, तो कभी बच्चों के चेहरे की ओर। जमाल कहते एक दिन में एक पावरलूम से पांच साड़ी तैयार हो जाती थी। हमारे घर में दो मशीनें हैं। जब यह चलती थी तो कारोबार चलता था।  बाढ़ का पानी भरा तो अरमान पर भी पानी फिर गया है। हम लोगों का घर चलाना मुश्किल हो गया है। पांच बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रात गुजार रही है। 

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शहनाज बानो - फोटो : अमर उजाला
नई बस्ती पुराना पुल में टेंट लगाकर रह रहे बाढ़ प्रभावित मुमताज ने बताया कि वह परिवार के साथ किराए पर रहती थी। अचानक आई बाढ़ में घर पूरी तरह डूब चुका है। रात में घर में अचानक घुसे पानी में कुछ ही जरूरी सामान निकाल के दूसरे के घर पर रखा है, लेकिन बाढ़ में शादी के दौरान मिले सामान भी बह गए हैं। बाढ़ में मां की यादों से जुड़ा मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा। 
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सोनातालाब में बाढ़ का हाल - फोटो : अमर उजाला
ढेलवरिया इलाके में बाढ़ राहत शिविर में सुबह केला दूध और दोपहर व रात में खाना मिल रहा है। अंतिम कतार में रहने वाले हंसराज पांडेय ने बताया कि पिछले 10 दिनों से यहां है, कई बार उन्हें खाना नहीं मिल पाता है। वहीं राजस्व विभाग के कर्मचारी अमन का कहना है कि जो लोग समय पर टेंट में मौजूद नहीं रहते हैं, उन्हीं को खाना नहीं मिल रहा होगा। बाकी यहां रह रहे लोगों में खाने का वितरण किया जा रहा है। 
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रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे एनडीआरएफ के जवान - फोटो : अमर उजाला
शैलपुत्री स्थित नई बस्ती इलाके  में क्षेत्र की लालमनी हो या गुड्डी देवी, संगीता, रुकसाना, परवीन के सामने घर की सुरक्षा और परिवार के सदस्यों को बचाने का भी संकट है। परिवार की महिलाएं जहां टेंट में रहने को मजबूर हैं, वहीं पुरुष घर की छतों पर रात गुजार रहे हैं। इसी क्षेत्र की मिनता के घर की कहानी भी अजीब है, कहने को तो घर में बच्चे की आने की खुशियां मनाई जानी थी, लेकिन बाढ़ में बच्चे को न दूध नसीब हो पा रहा न जच्चा को भोजन। 
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बाढ़ राहत शिविर में भोजना का इंतजाम - फोटो : अमर उजाला
गंगा में आई बाढ़ शहर से लेकर गांव तक लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। किसी का काम छूटा तो किसी का धंधा मंदा हो गया है। वहीं बाढ़ में फंसे लोगों के लिए राशन, पानी सबसे बड़ी परेशानी है। वरुणा पार ढेलवरिया इलाके में सैकड़ों मकान पानी में डूब गये हैं। यहां के लोग बिहारीजी मंदिर के पास टेंट में रह रहे हैं, तो कोई छत का सहारा ले रहा है। 

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नमो घाट पर बाढ़ का नजारा - फोटो : अमर उजाला
गंगा में उफान का आलम ये है कि नमो घाट पर नमस्कार की मुद्रा वाली आकृति को डूबने अब कुछ ही घंटे बाकी हैं। बाकी अन्य पक्के घाटे भी धीरे-धीरे डूबते जा रहे हैं। दशाश्वमेध और शीतला घाट के जरिए पानी सड़क होते हुए सब्जी मंडी तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों में रमना, डाफी, चिरईगांव, व चौबेपुर आदि इलाकों के दर्जनभर से अधिक गांवों का सम्पर्क आसपास से कट गया है। 

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सड़क पर आया बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ का पानी शाहंशाहपुर में पूरी तरह फैल गया है। यहां करीब तीन किलोमीटर का क्षेत्रफल पानी से जलमग्न हो गया है। शाहंशाहपुर-मगराहा मिर्जापुर जाने वाला संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन बंद है। सोमवार को भी बाढ़ का पानी खेतों की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। कई किसान पशुओं को हरे चारे की कटाई में लगे हुए थे। राजकुमार पाल की चार बीघे में लगी केले की फसल पानी में डूब गई है।
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मणिकर्णिका घाट पर बाढ़ का नजारा - फोटो : अमर उजाला
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पर गंगा गलियों में प्रवेश करने के साथ ही ऊपरी तल पर होने वाले शवदाह के प्लेटफार्म तक पहुंचे से चंद मीटर दूर है। जगह कम होने के कारण एक शव को जलाने में पांच से छह घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर भी गलियों में जगह कम पड़ने लगी है। 
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