वाराणसी में नदियां उफान पर हैं। इस साल पहली बार गंगा चेतावनी बिंदु से तीन सेंटीमीटर ऊपर पहुंचीं। वहीं 14 साल में 8वीं बार ये नौबत आई। उधर, वरुणा का पानी घरों में घुस गया है। जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
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वाराणसी में बाढ़ का पानी घरों में घुसा
- फोटो : अमर उजाला
गंगा ने मंगलवार को इस साल पहली बर चेतावनी बिंदु पार कर लिया। केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज पर मंगलवार की रात 10 बजे तक जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया जो चेतावनी बिंदु से तीन सेंटीमीटर ज्यादा है। इसके बाद जलस्तर स्थिर हो गया। गंगा अभी खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन शहर और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का असर है। काशी में 14 साल (2013 से 26 के बीच) के दौरान गंगा का जलस्तर 8 बार चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। 2019 और 2022 में पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। दूसरी तरफ, वरुणा नदी के उफनाने से बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है।
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मणिकर्णिका घाट पर छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार
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150 की जगह 50 शवों का ही अंतिम संस्कार, लकड़ियां भीग जा रहीं
गंगा में आई बाढ़ से दशाश्वमेध घाट पूरी तरह डूब गया है। जल पुलिस का कार्यालय का ऊपरी हिस्सा ही दिख रहा है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित है। शवों को छत पर ले जाने में दिक्कत आ रही है। गलियों से नाव के सहारे शव ले जाए जा रहे हैं। लकड़ियां भीग गई हैं। पानी के बीच से लकड़ियां ले जानी पड़ रही हैं। घाट से जुड़े लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में रोज 150 शवों का अंतिम संस्कार होता था जो अब 50 रह गया है। अस्सीघाट पर सुबह ए बनारस का मंच डूब गया है। तीन सीढ़ी पानी और चढ़ा तो सड़कों पर आ जाएगा।
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वाराणसी में बाढ़
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नगवा नाले के किनारे बिजली आपूर्ति बंद, रामेश्वर मठ में घुस सकता है पानी
नगवा नाले में गंगा का पानी बढ़ रहा है। करीब आधा फीट और पानी बढ़ा तो रामेश्वर मठ में प्रवेश कर जाएगा। मठ में निचले हिस्से का सामान पहले ही दूसरी मंजिल पर पहुंचा दिया गया है। पानी बढ़ने के बाद नाले के किनारे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। जेनरेटर के सहारे बिजली की व्यवस्था की जा रही है।
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वाराणसी में बाढ़ से दुश्वारियां
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नक्खीघाट से सरैया तक घरों में घुसा बाढ़ का पानी
वरुणा नदी के उफान ने नक्खीघाट से सरैया तक कई बस्तियों में संकट खड़ा कर दिया है। हजारों घरों में पानी घुस गया है। नगवा, रमना और वरुणा के तटवर्ती इलाकों के साथ चौबेपुर क्षेत्र में भी खेत, संपर्क मार्ग और गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ढेलवरिया, नई बस्ती, मौजा हाल, दीनदयालपुर, अमरपुर बटलोहिया, मढ़िया, उंचवा, सक्कर तालाब, पुराने पुल, सरैया, शैलपुत्री माता मंदिर और तीन पुलिया क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों में पहुंच गया। इससे लोगों को पलायन करना पड़ा। जरूरी सामान के साथ लोग राहत शिविरों में जाने लगे। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। नक्खीघाट, सरैया और पुराने पुल क्षेत्र में राहत शिविर बनाए गए हैं।
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वाराणसी में बाढ़
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पुराने पुल पर बांध का फाटक खोला गया
पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए पुराने पुल पर सिंचाई विभाग के बांध का फाटक खोला गया है। इससे नदी के प्रवाह में तेजी आई है। निचले इलाकों में दबाव बढ़ा है। इस बीच प्रशासन और राजस्व टीमें प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं।
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वाराणसी में बाढ़
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शास्त्री घाट और वरुणा कॉरिडोर भी डूबे, लोहता क्षेत्र में तीन फीट बढ़ा पानी
शास्त्री घाट पर वरुणा का पानी सीढ़ियों तक पहुंच गया। हनुमान मंदिर चारों ओर से पानी से घिर गया है। वरुणा कॉरिडोर का अधिकांश हिस्सा डूब गया है। केवल प्रवेश वाला हिस्सा दिख रहा है। वहीं, मशीन लगाकर जलकुंभी निकाली गई है। लोहता क्षेत्र में भी वरुणा का पानी 12 घंटे में तीन फीट बढ़ गया। बेदौली, मथुरापुरा, भरथरा, छितौनी, टड़िया, कोटवां, कोरऊत और अयोध्यापुर के तटवर्ती इलाके प्रभावित हैं। खरीफ की फसलें पानी में डूब गई हैं। पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है।
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वाराणसी में बाढ़
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नाद और गोमती के बीच फंसा पिपरी गांव, मठिया प्राथमिक विद्यालय परिसर में पानी भरा
चौबेपुर के पिपरी गांव की स्थिति भी लगातार बिगड़ रही है। नाद और गोमती नदी के बीच बसे गांव के चारों तरफ पानी पहुंच गया है। मठिया-पिपरी और धौरहरा-बेला मार्ग पर पानी भरने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों को वैकल्पिक रास्तों से 15 से 20 किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। मठिया प्राथमिक विद्यालय और चौधरी चरण सिंह स्मारक के आसपास भी पानी भर गया है। बर्थरा खुर्द, टांड़ अजांव, धौरहरा, हरिहरपुर, मठिया, पिपरी समेत कई गांवों में धान, गन्ना और पशुओं के चारे की फसलें जलमग्न हो गईं। गंगा किनारे सरसौल, लूंठा, बर्थराकलां, शिवदशां, परनापुर, चंद्रावती, रामपुर, ढकवां और कैथी में भी पानी फैल रहा है। गौरा उपरवार, कैथी और चंद्रावती घाटों की सीढ़ियां डूब चुकी हैं।
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वाराणसी में बाढ़
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गंगा की स्थिति
मंगलवार रात 10 बजे तक जलस्तर : 70.29 मीटर
चेतावनी बिंदु : 70.26 मीटर
खतरे का निशान : 71.26 मीटर
खतरे के निशान से दूरी : 97 सेंटीमीटर
ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर : 73.90 मीटर
स्थिति : जलस्तर स्थिर
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वाराणसी में बाढ़ के कारण राहत शिविर में ठहरे लोग
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कोनिया में नाव से निकले विधायक, राहत शिविर भी पहुंचे
शहर दक्षिणी से भाजपा विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बाढ़ प्रभावित कोनिया क्षेत्र का नाव से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बात कर उनकी समस्याएं जानीं और अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक नावों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। सुभाष चंद्र बोस प्राथमिक विद्यालय में राहत शिविर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बच्चों को चॉकलेट, बिस्किट व फल बांटे।
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वाराणसी में बाढ़
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आदि केशव से सराय मोहना तक नाव से पहुंचे अफसर, बाढ़ प्रभावितों का जाना हाल
गंगा और वरुणा में बढ़े जलस्तर के बीच मंगलवार को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का नाव से दौरा किया। आदि केशव घाट से सलारपुर, सरैया, कोनिया, पुल कोहना, ढेलवरिया और सराय मोहना तक पहुंचे अधिकारियों ने जलभराव और प्रभावित आबादी की स्थिति देखी। राहत शिविरों में व्यवस्थाओं का जायजा लेकर डीएम ने सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए। पुलिस कमिश्नर ने पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने को कहा। दोनों अधिकारियों ने प्राथमिक विद्यालय सलारपुर और विद्या विहार इंटर कॉलेज सलारपुर, रसूलगढ़ में बनाए गए बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण किया।
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वाराणसी में बाढ़
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अपना घर आश्रम में घुसा बाढ़ का पानी, 108 दिव्यांग शिफ्ट
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण सामने घाट स्थित अपना घर आश्रम में मंगलवार को बाढ़ का पानी घुस गया। दिव्यांग वार्ड लबालब हो गया। 108 दिव्यांगों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रथम और द्वितीय तल पर शिफ्ट कर दिया गया। संचालक डॉ. के निरंजन ने बताया कि हर बार बाढ़ में आश्रम में पानी आ जाता है।
13 बाढ़ राहत शिविर चालू, 219 प्रभावित परिवारों के 935 व्यक्ति रह रहे
एडीएम प्रशासन सदानंद गुप्ता ने बताया कि 11 मोहल्ले/वार्ड आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वरुणा नदी के बाढ़ से जनपद में 328 परिवारों के 1388 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं। जिले में 13 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। 219 प्रभावित परिवारों के 935 व्यक्ति निवास कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने 32 नावों की व्यवस्था की है।