मौसम का मिजाज बदलने से पूर्वांचल में अब ठंड का तेवर और तल्ख होने वाला है। पिछले एक पखवारे से तापमान में तेजी से उतार चढ़ाव जारी है। सोमवार सुबह से बादलों का भी डेरा पूर्वांचल पर छा गया। पहाडों पर बर्फबारी के बाद सुबह और शाम गलन का जोर दिखने लगा है। सुबह कोहरे से सड़कों पर वाहनों की गति भी सुस्त पड़ गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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हवा चलने से बढ़ी ठंड
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को पूरे पूर्वांचल में मौसम का अलग ही रुख दिखा। कहीं धूप निकला भी तो जल्द ही बादलों की ओट में चला गया। बादलों की आवाजाही हालांकि देर रात से ही जारी थी मगर सुबह आसमान बादलों की जद में रहा और गलन के कोप से लोग ठिठुरते नजर आए। दिसंबर के पहले सप्ताह से ही मौसम में बदलाव शुरू हो गया था। दिसंबर में अब तक का न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस 10-11 दिसंबर को रहा, जबकि अधिकतम तापमान 24.8 रिकॉर्ड किया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
दिन में तेज धूप होने के बाद भी सर्दी का अहसास हो रहा है और शाम होते ही गलन बढ़ रही है। दिन में अधिकतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस होने की वजह से लोग बिना गर्म कपड़े के बाहर निकल रहे थे, लेकिन शाम को तापमान में गिरावट होने की वजह से ठंड लगने लगी। हालांकि ठंड बढ़ने से घाटों की रौनक कम नहीं हुई। इस मौसम में पर्यटकों में इजाफा हुआ है।
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हवा चलने से ठंड व गलन बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
पिछले एक सप्ताह से न्यूनतम तापमान तेजी गिरा। 10-11 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस था, दो दिन बाद तापमान 13 तक पहुंच गया और अब न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस है।
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बदलते मौसम के कारण अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई। चिकित्सक भी लोगों को शाम को घर या ऑफिस से बाहर निकलने पर गर्म कपड़े पहनकर निकलने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लेने की सलाह दे रहे हैं।
इस हफ्ते उत्तर-पश्चिम हवाओं के चलने से ठंड बढ़ने के साथ ही गलन ओर कोहरा भी पड़ेगा। पहाड़ों पर बर्फबारी और पछुवा हवाओं के चलने से मुश्किलें बढ़ेगी। कोहरा, धुंध और गलन से जनजीवन तो प्रभावित होगा ही हवाई, रेल और सड़क मार्ग भी प्रभावित होगा। बीएचयू के मौसम विज्ञानी के मुताबिक, मैदानी भागों में कोहरा और धुंध छाऐ रहने की पूरी संभावना है।