काशी में एक ऐसी जगह भी है जहां साल भर लस्सी मिलती है। बनारस में आकर जायकेदार लस्सी का स्वाद नहीं लिया तो आप बहुत कुछ मिस करेंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
चीनी मिट्टी के मरतबान में फेंटती दही, चीनी और उस पर केवड़ा व गुलाब जल की बूंदे...। जैसे लस्सी का जायका ही बदल देती है। मरतबान से सीधे जब ग्लास में पलटी जाती है तो उस पर मोटी मलाई की परत। फिर तो उस लस्सी का जवाब ही नहीं। बड़ा ग्लास जैसे ही मुंह को आए तो होठों के ऊपर बड़ी लस्सी की बनी बड़ी सी मूंछ को जुबान से अंदर करना कोई नहीं भूलता।
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जी हां, रफीक लस्सी वाले के यहां की लस्सी का स्वाद ही ऐसा है। दालमंडी की संकरी गलियों के ठीक बीचोंबीच रफीक लस्सी की यह दुकान है। जिस वक्त भी इधर से गुजरो दुकान में पैर रखने को जगह आपको नहीं मिलेगी। दुकान के बाहर गली तक लोगों की लाइन लगी रहती है।
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रमजान के दिनों में इफ्तार के बाद यहां जो भीड़ बढ़ती है तो देर रात तक लोगों से पटी रहती है। यहां आपको सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बारहों महीने लस्सी मिलेगी ही मिलेगी। हां, ये जरूर है कि ठंड में लस्सी के साथ शाही टुकड़ा का जायका भी यहां आपको मिलेगा।
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दालमंडी में पूर्वांचल भर से आने वाले खरीदार, दुकानदार ने यहां की लस्सी न पी हो, शायद ही ऐसा हो। यह दुकान करीब 70 साल पुरानी है जिसे कि मियां रफीक ने ही शुरू किया था। अब उनके बेटे इसे चला रहे हैं। कभी यह दालमंडी की इकलौती लस्सी की दुकान हुआ करती थी।