झोपड़ी में रहने को मजबूर गंगा बाढ़ के पीड़ित
- फोटो : amar ujala
उन्हें उम्मीद थी कि हो सकता है राज्यपाल के कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए जिला प्रशासन उनके लिए घोषणा कर दें, लेकिन राज्यपाल ने गंगा की निर्मलता, अविरलता और स्वच्छता की तो बातें की, लेकिन उनके दूसरे स्वरूप यानी बाढ़ के पीड़ितों के घाव पर मरहम लगाना भूल गईं। बताते चलें कि दुबे के छपरा के लगभग 1000 लोग गंगा के बाढ़ से बेघर होकर झोपड़पट्टी में रहने को विवश हैं।