दरअसल, कछुआ सैंक्चुअरी के चलते गंगा में वर्षों तक किसी तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित थीं। ऐसे में गंगा पार इलाके में रेती और मिट्टी एकत्र होकर पहाड़ सा बन गया है। इसके चलते गंगा का प्रवाह घाटों पर तेज हो गया है और भविष्य में इससे घाटों को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा राजघाट से अस्सी के बीच प्रस्तावित रो रो सर्विस में कई जगहों पर कम पानी की समस्या बड़ी बाधक बन रही है।