गंगा घाट पर अपनी ही धुन में लीन विदेशी
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मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ की नगरी में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गंगा स्नान कर तिल-गुड़ दान करने से सुख व शांति संग अक्षय फल की प्राप्ति होती है। भारी भीड़ के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर के तीनों प्रवेश द्वार पर लंबी लाइन लगी और दिन भर यलो जोन की गलिया जाम रहीं।
मंडियां और बाजार हमेशा की तरह शुक्रवार को भी सामग्रियों से पटे रहे मगर आज रुतबा किसी का था तो तिल-गुड़ से निर्मित लड्डू, तिलवा, तिलकुट सहित अन्य आइटम का। दशाश्वमेध, गोदौलिया, चेतगंज, जगतगंज, विश्वेश्वरगंज, सोनारपुरा, लंका, सुंदरपुर, वरुणापार क्षेत्र मेंभोजूबीर, अर्दली बाजार, पांडेयपुर, पहड़िया में तो तिल-गुड़, लइया, पट्टी, चूड़ा की अस्थाई दुकानें पग-पग पर दिखीं।