आदि विश्वेश्वर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में देव दीपावली की रात पूरा देवलोक गंगा के तट पर उतर आया। पीएम नरेंद्र मोदी ने जैसे ही दीप जलाया तो उत्तरवाहिनी के अर्ध चंद्राकार घाटों ने दीपों के चंद्रहार से श्रृंगार किया। शाम होते ही 15 लाख दीयों से गंगा के 84 घाट जगमगा उठे। अलौकिक आभा को देश ही नहीं दुनिया ने भी निहारा। रात गहराने के साथ ही गंगा की लहरों पर दीयों के प्रकाश का स्वर्णिम सौंदर्य बिखर गया।
सोमवार की शाम ढलने से पहले ही आस्थावानों की कतार गंगा घाटों की ओर मुड़ चली। कोरोना संक्रमण का असर आस्था के आगे नतमस्तक नजर आया। धूप-दीप, गुग्गुल, लोबान की सुवास ने श्रद्धा के भाव संग शाम होते ही घाटों को गमकाया तो घाटों की अर्ध चंद्राकार शृंखला भी आस्था के अपार सागर से ओतप्रोत नजर आई।
विज्ञापन
2 of 10
अभिवादन स्वीकार करते पीएम मोदी।
- फोटो : ANI
घाटों की साज सज्जा ऐसी कि मानो स्वर्ग साक्षात मां गंगा के आंचल में समाने को व्याकुल हो रहा हो। दूर गंगा के उस पार रेती पर भी आस्थावानों की चहलकदमी घाटों की अर्ध चंद्राकार छवि को अपलक निहारती नजर आई। सूर्यास्त के साथ ही माटी के दीपों में तेल की धार से रुई की बाती तर होकर दैदीप्यमान हो उठी।
विज्ञापन
3 of 10
दीपों से सजा गंगा पार का इलाका
- फोटो : अमर उजाला
गोधूलि बेला में एक-एक कर दीपों की असंख्य लड़ियां पूनम के चांद को भी अपनी रोशनी से चुनौती देते नजर आईं। दीपों की अनगिनत कतारों से अर्ध चंद्राकार घाटों ने दीयों के चंद्रहार का स्वरूप ले लिया। गंगा तट के दूसरे किनारे पर भी गंगा की रेती भी दीयों से प्रकाशमान हो उठी। गंगा के इस ओर से उस छोर तक सिर्फ और सिर्फ दीपों की कतार ही नजर आ रही थी। काशी विश्वनाथ दरबार से लेकर सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर शाम होते ही दीयों से सजने लगा।
4 of 10
दीपों से सजा गंगा पार का इलाका
- फोटो : अमर उजाला
एक साथ जल उठे लाखों दीप
दशाश्वमेध घाट पर दोपहर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम ढलते-ढलते घाट पर पांव रखने की भी जगह मिलनी मुश्किल हो गई। इसके बाद लोगों ने दूसरे घाटों की ओर बढना शुरू कर दिया। पंचगंगा घाट पर प्रकाशित होने वाला हजारा दीपों के मंच ने भी आभा बिखेरी।
विज्ञापन
5 of 10
दीपों से सजे गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
आस्थावानों ने अर्पित की श्रद्धा
देव दीपावली पर घाट, गलियां और नदी का किनारा श्रद्धालुओं से पटा नजर आया। जैसे-जैसे भगवान भाष्कर अस्ताचलगामी हुए गंगा तट, कुंड, सरोवर और मंदिरों में दीपदान करने वालों का रेला बढ़ता ही चला गया।
विज्ञापन
6 of 10
दीपों से सजे गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा मारकंडेय महादेव, जागेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, सारंगनाथ महादेव, बड़ा गणेश, कालभैरव, बटुक भैरव, मणि मंदिर, बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में भी शाम होते ही दीप जल उठे।
विज्ञापन
7 of 10
दीपों से सजे गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
घाटों पर झांकियों और रंगोली ने मोहा मन
आस्थावानों की भीड़ ने गंगा की निर्मलता को नमन कर गंगा के प्रति आस्था निवेदित की। पीएम के स्वागत में हर घाट पर अपनी विशेषता और पहचान के अनुसार झांकी, चित्र, रंगोली और लीलाओं के जरिय प्रस्तुत किया गया।
8 of 10
दीपों से सजे गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
तुलसी घाट पर कंस वध की लीला और कंस का पुतला दहन, जैन घाट पर अहिंसा परमो धर्म का संदेश देती रंगोली, प्रभु घाट पर पेंटिंग, चेतसिंह घाट पर लेजर शो में काशी की संस्कृति, मंदिर, घाट और काशी विश्वनाथ के दर्शन हुए।
9 of 10
दीपों से सजे गंगा घाट
- फोटो : ANI
महानिर्वाणी घाट पर समुद्र मंथन, हरिश्चंद्र घाट पर डोमराजा का कटआउट, शिवाला घाट पर दीयों के जरिए शिवजी का दर्शन, हनुमान घाट पर संगीतकारों का चित्र, दशाश्वमेध घाट पर इंडिया गेट और त्रिपुरा भैरवी घाट पर नमामि गंगे का संदेश आकर्षण का केंद्र रहा। दूसरी ओर घाटों पर रंगोली सजाते लोगों ने अनोखे थीम पर घाटों की रंगत भी निखारने में कोई कोताही नहीं बरती।
संत रविदास की प्रतिमा पर आदरांजलि अर्पित करते पीएम
- फोटो : अमर उजाला
रोशनी से नहा उठे गंगा घाट
उत्तरवाहिनी मां गंगा समेत नदियों और सरोवर कुंडों के तट पर लाखों दीपों की मालाएं जगमगा उठीं। वरुणा नदी के तट पर रामेश्वर और शास्त्री घाट भी दीपों और रोशनी से दिन ढलने के साथ ही नहा उठा। अनुपम और अनोखी छवि को आंखों में बसाने के लिए काशी की जनता का उल्लास देखते ही बना।