यूपी के आजमगढ़ जिले में 16 नंवबर को चलती गाड़ी में शिक्षिका से हुए गैंगरेप मामले का पुलिस ने गुरुवार को सनसनीखेज खुलासा किया है। शिक्षिका के परिजनों ने रानी की सराय थाने में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में तब एक नया मोड़ आ गया जब गुरुवार को पुलिस ने यह बताया कि कोई गैंगरेप हुआ ही नहीं था। पुलिस के दावों पर परिजनों ने विश्वास नहीं किया और जमकर बवाल काटा। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने बताया कि युवती से गैंगरेप नहीं हुआ था बल्कि उसने अपने दिव्यांग पति से छुटकारे में लिए झूठी कहानी रची थी। उधर, पुलिस के इस खुलासे पर युवती के परिजन और रिश्तेदार भरोसा नहीं कर रहे। पुलिस के इस खुलासे के बाद वे हंगामा करने लगे। इस दौरान महिला एसओ की गाड़ी घेरकर उन्होंने नारेबाजी भी की। मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है।
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एक पार्टी का झंडा लगे स्कॉर्पियो सवारों द्वारा शिक्षिका के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना के खुलासे के लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी के निर्देश पर अधिकारी लगे थे। एसपी सिटी कमलेश बहादुर ने बताया कि 24 वर्षीय शिक्षिका क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल और एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाती है। 17 नवंबर को उसने रानी की सराय थाने में तहरीर दी। बताया कि 16 नवंबर की शाम कोचिंग से घर लौटने के दौरान एक राजनीतिक पार्टी का झंडा लगे स्कार्पियो सवार चार युवकों ने उठा लिया और रेप किया। साथ ही उन लोगों ने वीडियो बनाने के साथ ही शिकायत करने पर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दी गई थी।
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एसपी ने बताया कि डाक्टर के न मिलने की वजह से युवती का मेडिकल 19 नवंबर को हुआ। जिला महिला अस्पताल की डाक्टर ने बलात्कार न होने की रिपोर्ट दी। पुलिस ने बताया कि पीड़िता ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसकी शादी एक मूकबधिर से कर दी गई है। इससे छुटकारा पाने के लिए उसने यह झूठी कहानी रची थी। वहीं, पुलिस के खुलासे को फर्जी बताकर परिवार के लोग और रिश्तेदार नाराज हो गए।
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दोपहर तीन बजे महिला एसओ छात्रा को लेकर निकली तो ऑफिस के सामने उनकी गाड़ी घेर कर हंगामा शुरू कर दिया गया। भारी संख्या में पुलिस पहुंची और कई लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली चली गई। पुलिस के दावे पर घरवालों का सवाल था कि रानी की सराय थाने की बजाय पीड़िता से 21 नवंबर की रात सिधारी थाने में क्यों पूछताछ की गई। कोर्ट में धारा 164 का बयान दर्ज कराने के लिए उसे अकेले क्यों भेजा गया। उससे पहले घर वालों से क्यों नहीं मिलने दिया। साथ ही उन्होंने उस लड़के का नाम भी सार्वजनिक करने को कही जिससे युवती द्वारा फोन पर बात करने की बात की जा रही।
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कोतवाली परिसर में महिला मंडल की पदाधिकारियों सहित अन्य के समक्ष सीओ सिटी अजय कुमार यादव ने पीड़िता की मां और चाची से पूछा कि आप लोग ही उसे पति से छुटकारा दिलाने के लिए गवना के बाद छोड़ने की बात कहे थे। इस पर घरवालों ने सहमति जताई। उन्होंने बताया कि शहर में बारावफात का जुलूस आदि निकल रहा था। ऐसे में कोई घटना होने पर अधिकारी आसानी से मौके पर पहुंच जाए, इसलिए वहां पूछताछ की गई। इस दौरान पीड़िता की मां भी थी।
अकेले भेजे जाने के बारे में बताया कि कोर्ट में कलमबंद बयान होता है। वहां जज, पीड़िता और महिला कांस्टेबल के अलावा कोई नहीं रहता। इसलिए उसे कोर्ट में अकेले भेजा गया। सीओ सिटी ने पीड़िता की मां और चाची से पूछा कि अब तक वह आप लोगों के समक्ष ही तीन तरह का अलग-अलग बयान दे चुकी है। ऐसे में कोर्ट में हुए कलम बंद बयान में वह जो भी बात कहेगी। उसके तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।