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बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा: वाराणसी में महिलाएं शव लेकर पहुंची श्मशान घाट, दी मुखाग्नि

Mon, 30 Aug 2021 01:35 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बेटियों ने पिता की अर्धी को दिया कंधा। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में एक ऐसा नजारा सामने आया, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक कुरीतियों का त्याग करते हुए बेटियों ने रविवार को परिवार की महिलाओं के साथ पिता की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट पहुंचाया। इसके बाद मुखाग्नि दी। इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैल गई और लोग बेटियों द्वारा उठाए गए इस कदम की तारीफ कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, चौबेपुर थाना क्षेत्र के बरियासनपुर गांव के हरिचरण पटेल(80) का शनिवार की रात देहांत हो गया था। उनका एक पुत्र भागीरथी पटेल था। पिता की मौत की खबर उसने अपनी बहन प्रेमा देवी और हीरामनी देवी को दी। थोड़ी ही देर में दोनों बहनें आ गईं। उन्होंने बताया कि उनके पिता के नेत्र दान करने का संकल्प लिया। परिजनों ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए वाराणसी आई बैंक सोसाइटी को सूचना दी। एक घंटे में डॉ. अजय मौर्या आए और कुशलता पूर्वक दोनों नेत्र निकाले गए। देखें अगली स्लाइड्स...
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अब दाह संस्कार की बात आई तो दोनों बेटियों ने महिलाओं के कंधे पर अर्थी को श्मशान घाट पहुंचाने और खुद मुखाग्नि देने का प्रस्ताव रखा। बेटियों ने कहा कि उनके दादा कॉमरेड अयोध्या पटेल ने इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उनके पिता की भी यही इच्छा थी।
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इस पर बेटा भागीरथी ने समाज से अनुमति मांगी। वहां मौजू ग्राम प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष बालकिशुन पटेल व पूर्व ग्राम प्रधान देवराज पटेल ने ऐसा करने के लिए हां कर दी। तय यह हुआ कि परिजन कफन के स्थान पर मदद में पैसे देंगे, जिससे लकड़ी खरीदने में सहायता मिले।

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रविवार की सबेरे बेटियों ने परिवार की महदेई, सुधा, सहदेई, मंशा, देसी, लल्ली, रेखा, सुनीता, अमरावती आदि महिलाओं के सहयोग से अर्थी को कंधे पर उठाया और आग चल दीं।
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सभी महिलाएं पांच किलोमीटर दूर सरायमोहाना स्थित गंगा नदी के किनारे श्मशान पर पहुंचीं और चिता लगाई। इसके बाद मुखाग्नि भी दी।
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