कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और फिल्म दंगल की बास्तविक पात्र पहलवान गीता फोगाट रविवार को वाराणसी पहुंची। जैपुरिया स्कूल के पड़ाव कैंपस में आयोजित वार्षिकोत्सव में पहुंचीं गीता ने कई मुद्दों पर बात की। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट
- फोटो : अमर उजाला
गीता फोगाट ने कहा कि बाकी प्रदेशों में पदक जीतने के बाद पहलवानों की सुध ली जाती है जबकि हरियाणा में पदक मिलने से पहले भी उन्हें वो सभी सुविधाएं दी जाती हैं, जिनकी बदौलत वे खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं के योग्य बनाते हैं। कुश्ती में यूपी सरकार को भी हरियाणा से सीख लेनी चाहिए।
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गीता फोगाट
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शहरों से कहीं अधिक ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा तभी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं निकलेंगी। यह कहना है कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान गीता फोगाट का। वह रविवार को काशी में थीं। जैपुरिया स्कूल के पड़ाव कैंपस में आयोजित वार्षिकोत्सव में पहुंचीं गीता से बच्चों ने कई सवाल भी पूछे।
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गीता फोगाट
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उनके और उनके परिवार की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘दंगल’ के बारे में गीता ने कहा कि फिल्म से मिली पब्लिसिटी से वह खुश भी हैं और नाखुश भी। एक खिलाड़ी यही चाहता है कि उसे उसके खेल से पहचाना जाए।
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गीता फोगाट
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गीता फोगाट ने कहा कि कोई भी खिलाड़ी बहुत मेहनत कर ऊपर पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें उनके खेल के कारण ही पहचाना जाय तो अच्छा लगता है। उन्होंने ‘दंगल’ के बाद लोगों का कुश्ती के प्रति बढ़ा रुझान और उनके पिता को मिली पहचान पर खुशी जाहिर की।
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गीता फोगाट
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वाराणसी में मिले प्यार से अभिभूत गीता ने कहा कि उत्तर प्रदेश महिला कुश्ती का देश का दूसरा बड़ा केंद्र है। यहीं की उनकी सीनियर अल्का हैं जिन्होंने कई स्पर्धाओं में स्वर्ण और अर्जुन अवार्ड जीता है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं, बस सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
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गीता फोगाट
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उन्होंने कहा कि देशवासियों के स्नेह की बदौलत फोगाट बहनें 2020 के ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगी। ओलंपिक की तैयारी के लिए चुने गए पहलवानों पर केंद्र सरकार भी ध्यान दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखना होगा। तभी अच्छे खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे।
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गीता फोगाट
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छात्राओं की हौसलाअफजाई करते हुए गीता ने कहा, आज किसी मामले में लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं। हमारे समाज में बेटा-बेटी में भेदभाव किया जाता है, यह कतई नहीं होना चाहिए। अभिभावकों से अपील की कि बच्चे जो भी चाहें उन्हें करने दें, खेलने दें। खुलकर उड़ान भरने दें।
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गीता फोगाट
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जीवन में अनुशासन और माता-पिता की भूमिका पर सवाल पूछा तो गीता ने कहा कि बच्चों के गुरु उनके माता-पिता होते हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा से ही जीवन अनुशासित और विकसित होता है।
वाराणसी में मिले प्यार से अभिभूत गीता ने कहा कि उत्तर प्रदेश महिला कुश्ती का देश का दूसरा बड़ा केंद्र है। यहीं की उनकी सीनियर अल्का हैं जिन्होंने कई स्पर्धाओं में स्वर्ण और अर्जुन अवार्ड जीता है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं, बस सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है।