काशी का सौंदर्य, कला, संस्कृति की छटा यहां के घाट और सड़कों पर अपने अद्भुत कलेवर में दिखने को तैयार है। ‘स्वच्छाग्रह’ में शिव की नगरी को नया रूप देने की तैयारी हो गई है। इसे मूर्त रूप दे रहे हैं बीएचयू दृश्य कला संकाय के प्रोफेसरों के नेतृत्व में 120 हुनरमंद छात्र। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
संस्कृति मंत्रालय की ओर से महात्मा गांधी की याद में ‘स्वच्छाग्रह : बापू को कार्यांजलि’ परियोजना की शुरुआत काशी में की जा रही है। इसके तहत 21-22 को दशाश्वमेध घाट पर सांस्कृतिक संध्या ‘रस बनारस’ का आयोजन किया गया है, वहीं इस परियोजना के तहत काशी के कुछ हिस्सों को नया रूप देने की कोशिश की गई है। इसमें शहर को काशी दर्शन की अमिट छाप से सजाया जाएगा।
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इसके लिए बीएचयू दृश्य कला संकाय के 120 छात्रों की टीम पिछले एक सप्ताह से काम कर रही है। मंगलवार तक इस काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट के तहत बीएचयू के छात्र 50 से अधिक इंस्टॉलेशन (कलाकृतियां) बना रहे हैं। इसमें कहीं रंगों का समायोजन दिखेगा तो कहीं पत्थरों को तराश कर बेहतरीन कृति पेश की जाएगी।
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- फोटो : अमर उजाला
दशाश्वमेध घाट पर पत्थरों के बने दस अश्व देखने को मिलेंगे जो कि दशाश्वमेध घाट के नाम को दर्शाएंगे। यहां आकाशदीप और कार्तिक पूर्णिमा के उत्सव का भी रंग पेंटिंग के रूप में दिखेगा। वहीं, दूसरी ओर शिवपुर स्थित तिराहे पर नंदी भगवान शंकर की नगरी काशी में लोगों को स्वागत करते नजर आएंगे।
शिवपुर तिराहे पर ही करीब आधा किलोमीटर तक विजुअल आर्ट्स के इन छात्रों द्वारा बनाए गए इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। 30 से 30 फीट चौड़े इन इंस्टॉलेशन में काशी के प्रमुख मंदिरों, घाट, गलियों के अलावा रामनगर की रामलीला, संत कबीर, रैदास, तुलसीदास विविध रंगों से सजे कैनवास पर नजर आएंगे।