छात्र-छात्राओं का मंचन देख आकर्षित हुए लोग।
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भारत अध्ययन केंद्र और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की ओर से नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला चलाई गई। इसमें 9 छात्राएं भी थीं। दोनों प्रशिक्षक भी महिला रहीं। नाट्य-निर्देशक डॉ. शिल्पा सिंह और नृत्य निर्देशन दिव्या श्रीवास्तव का था। संस्कृत विभाग के प्रो. एसके द्विवेदी के अनुसार, 16 फरवरी से शुरू हुई ट्रेनिंग आठ मार्च तक चली। फिर पहली बार इतने बड़े स्तर मंचन की तैयारियां की गईं। इस नाटक में संगीत और अन्य रचनात्मक कार्यों में 30 छात्र और छात्राओं का सहयोग रहा।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक प्रभावशाली एकांकी नाटक है। इसमें वीरता, कर्तव्यबोध और पारिवारिक संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण किया गया।