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BHU: छात्र-छात्राओं ने संस्कृत में किया मंचन, भरतनाट्यम् की छाउ शैली में अभिनय; तस्वीरों में महाभारत काल

Wed, 11 Mar 2026 12:24 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित इस नाटक के मंचन में विशेष रूप से भीम और उनके पुत्र घटोत्कच के अप्रत्याशित मिलन के माध्यम से मानवीय संबंधों, त्याग और धर्म के गहन भावों को प्रस्तुत किया।
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बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में भावपूर्ण मंचन। - फोटो : संवाद
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में संस्कृत संवाद और भरतनाट्यम छाउ शैली में अभिनय करते विद्यार्थियों ने दर्शकों को 70 मिनट तक महाभारत काल से बांधे रखा। अये! एष मध्यमः! अहं घटोत्कचः... पितरं प्रतिपालयन् जैसे संवाद पूरे भाव के साथ पात्रों के चेहरे पर थे। 

ब्राह्मण के मझोले पुत्र को अपना भोजन समझ रहे घटोत्कच को उनके ही पिता और पांडवों में मध्यम भीम ने संस्कृत में ही रोका तो खूब तालियां बजीं। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में मंगलवार को महाकवि भास रचित नाटक ‘मध्यमव्यायोग’ के 70 मिनट के मंचन की खास बात ये रही कि 16 विद्यार्थियों को संस्कृत विभाग में 20 दिनों तक संस्कृत बोलने और समझने की कड़ी ट्रेनिंग दी गई। 
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छात्र-छात्राओं का मंचन देख आकर्षित हुए लोग। - फोटो : अमर उजाला
भारत अध्ययन केंद्र और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की ओर से नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला चलाई गई। इसमें 9 छात्राएं भी थीं। दोनों प्रशिक्षक भी महिला रहीं। नाट्य-निर्देशक डॉ. शिल्पा सिंह और नृत्य निर्देशन दिव्या श्रीवास्तव का था। संस्कृत विभाग के प्रो. एसके द्विवेदी के अनुसार, 16 फरवरी से शुरू हुई ट्रेनिंग आठ मार्च तक चली। फिर पहली बार इतने बड़े स्तर मंचन की तैयारियां की गईं। इस नाटक में संगीत और अन्य रचनात्मक कार्यों में 30 छात्र और छात्राओं का सहयोग रहा। 

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक प्रभावशाली एकांकी नाटक है। इसमें वीरता, कर्तव्यबोध और पारिवारिक संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण किया गया। 
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सभागार में डांस करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में खुले आकाश के नीचे कतरनें का मंचन 
बीएचयू के मधुबन में फेमिनिस्ट कलेक्टिव सहित छात्र-छात्राओं की ओर से खुले आसमान के नीचे नाटक कतरनें का मंचन किया गया। इसमें महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और ऐसे मुद्दों पर सामाजिक उदासीनता पर चोट की गई। ऐपवा की राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने अमेरिका-इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमले में मारी गईं 165 बच्चियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवाद की निंदा की जाए। बीएचयू के हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका सोनकर और ऐपवा की राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने संवाद किया। 

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अपने नृत्य से लोगों को किया मंत्रमुग्ध। - फोटो : संवाद
न्याय पुरुष तय करता है और नैतिकता स्त्री : प्रो. चंद्रकला
बीएचयू में मंगलवार को न्याय और स्त्री : भारतीय संदर्भ विषय पर एक दिवसीय संवाद हुआ। मुख्य अतिथि महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. चंद्रकला पाडिया ने कहा कि महिलाएं दार्शनिक से लेकर सामाजिक और ऐतिहासिक स्तर पर हमेशा भेदभाव की शिकार रही हैं। ये तर्क आज भी प्रभावी है कि पुरुष द्वारा देखा गया ही शाश्वत है जबकि स्त्री की दृष्टि शाश्वत नहीं मानी जाती क्योंकि पुरुष के पास कारण है और स्त्री के पास भावनाएं। उन्होंने कहा कि न्याय पुरुष तय करता है और नैतिकता स्त्री। 
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भावपूर्ण मंचन के दाैरान कलाकार। - फोटो : संवाद
कई भारतीय प्राचीन ग्रंथों का हवाला देकर उन्होंने बताया कि पश्चिमी उपनिवेशवाद ने भारतीय इतिहास में स्त्री की दशा का गलत आंकलन और दुष्प्रचार किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दर्शन में रूसो और हेगल महिलाओं को अक्षम मानकर उनकी पवित्रता पर पुरुषवादी नियंत्रण स्थापित करते हैं।
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छात्राओं ने नृत्य की दी प्रस्तुति। - फोटो : संवाद
सामाजिक विज्ञान संकाय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की प्रो. विभा त्रिपाठी ने कहा कि कार्यस्थल पर प्रताड़ना से ज्यादा दुख न्याय मिलने में देरी से मिलता है। समाज की नैतिकता और संविधान की नैतिकता में बहुत अंतर है। संविधान की शुरुआत अपने घर से करनी होगी। 
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