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बीएचयू की जूनियर रेजिडेंट की आत्महत्या के पीछे कई राज, सुसाइड नोट का चौथा पेज है बहुत अहम

Mon, 24 Jun 2019 05:04 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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मनीषा कुमारी (फोटो फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू नेत्र रोग विभाग की जूनियर रेजिडेंट मनीषा कुमारी की आत्महत्या के पीछे कई राज छिपे हो सकते हैं। बीएचयू मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. संजय गुप्ता के अनुसार, पांच पेज के सुसाइड नोट को देखने से यही लगता है कि उसने आत्महत्या का फैसला अचानक नहीं लिया, बल्कि वह लंबे समय से अवसाद ग्रस्त थी। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
 
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लेडी डॉक्टर्स हॉस्टल के कमरा नंबर 41 में मनीषा अकेले रहती थी। बीते शुक्रवार को ओपीडी में ड्यूटी करने के बाद उसने ऑपरेशन थियेटर में भी काम किया। इसके बाद हॉस्टल आई। शनिवार को उसने आराम किया। रविवार को उसके जान देने की घटना से आसपास के कमरों की छात्राएं हतप्रभ है। उनका कहना है कि मनीषा के साथ मां एक महीने तक रहीं थीं। मां के जाने के बाद भी उसने किसी समस्या का जिक्र नहीं किया। वह कब कमरे में आती और ड्यूटी के लिए चली जाती, किसी को पता नहीं चलता था। वह काफी शांत स्वभाव की थी। उसने ऐसा कदम उठाया, यह समझ से परे हैं। प्रो. संजय गुप्ता का कहना है कि इस मामले में कई तरह की गुत्थियां हैं। टीबी की बीमारी में भी कुछ दवाएं ऐसी होती है, जिसकी वजह से डिप्रेशन जैसी स्थिति बन जाती है। पारिवारिक माहौल के साथ ही व्यक्तिगत जीवन की कुछ अहम बातें भी घटना की वजह हो सकती हैं। 
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सुसाइड नोट का चौथा पेज पूरी घटना में काफी अहम साबित हो सकता है। मनीषा ने लिखा है- मेरी पर्सनल लाइफ से जो रिलेटेड है, उसके लिए बस इतना कहना चाहूंगी कि मुझे तो माफ करे। मेरी सारी गलतियों के लिए, मैं अगर इस दुनिया में रही तो उसकी लाइफ बर्बाद हो जाएगी और में किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहूंगी। जितना भी समय हम लोगों ने साथ बिताया, वो काफी अच्छा था, पर उसके लिए पूरी जिंदगी बर्बाद कर देना, यह कहीं की समझदारी नहीं है। आप हमेशा खुश रहें, खूब तरक्की करें, बस मेरी यही आखिरी ख्वाहिश है। 

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मनीषा के सुसाइड नोट से भी कई सवाल उठ रहे हैं। उसने खुद को माता-पिता को खुश न रखने और नकरात्मक सोच वाली लड़की बताया। उसने भाई के बिजनेस को लेकर भी चिंता जताई और अपने पैसे से बिजनेस कराने को कहा। सबसे अहम तो यह है कि उसने पर्सनल लाइफ में किसी के साथ रहने का भी जिक्र करते हुए उसे खुश रहने और तरक्की करते रहने की कामना की है। मनीषा ने सुसाइड नोट की पहली लाइन में माता-पिता को सॉरी बोला है और अच्छी बेटी न बन पाने का जिक्र किया है। लिखा है- आपने हमेें प्यार किया, लेकिन हम इस दुनिया में रहने के काबिल नहीं हैं। सब कुछ है, फिर भी खुश नहीं हूं। हमेशा बस खामियां ही नजर आती हैं। यह भी लिखा है कि आप लोग हमेशा मेरा सहारा बने, लेकिन मैं आपका सहारा नहीं बन सकी। सुसाइड नोट के दूसरे पेज में अपने अकाउंट में पैसों का भी जिक्र करते हुए उससे भाई को बिजनेस कराने की बात कही है।
 
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यह भी कहा -
  • जिसको भी ये सुसाइड नोट मिले वह सबसे पहले मम्मी-पापा को दे।
  • मैं इस दुनिया से चली जाना चाहती हूं, इसलिए यह रास्ता चुना।
  • मुझ पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और किसी तरह की मेडिसिन का इफेक्ट भी नहीं।
  • मैंने पूरे होश में यह कदम उठाया है, इसलिए किसी को हक नहीं कि वह मेरे शरीर के साथ छेड़छाड़ करें।
  • जांच के बाद जो कुछ भी बताया जाए, वह मेरे माता-पिता के अलावा किसी को न बताया जाए। 
  • मेरे आचरण का असर मेरे काम पर भी पड़ रहा है, इस वजह से मैं डिप्रेश हुई।
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कमरे की छानबीन करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
कमरे में मिलीं कई तरह की दवाइयां :
मनीषा के कमरे से पुलिस को कई तरह की दवाइयां मिली हैं। इसमें कई दवाएं ऐसी भी है जो व्यक्तिगत समस्याओं में काम आती हैं। वहीं, हॉस्टल की अन्य छात्राएं, वार्डन और पुलिस उसके टीबी का मरीज होने का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई लिखित प्रमाण किसी के पास नहीं हैं।
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टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के प्रो. एसके अग्रवाल का कहना है कि टीबी की बीमारी के मरीज अगर नियमित छह सप्ताह तक दवा लें तो उसके लक्षण कम होने लगते हैं। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) टीबी घातक हो सकती है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने में अधिक समय लगता है। कुछ दवाएं जरूर ऐसी हैं, जिससे मन विचलित होने लगता है और अवसाद ग्रस्त जैसी स्थिति हो सकती है। 
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