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भरत मिलाप: 5 मिनट की लीला के भाव जानने काशी आए जापान दो शोधार्थी, 484 साल का खंगालेंगे इतिहास; बारीकियां भी

Thu, 22 Oct 2026 04:44 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

भरत मिलाप लीला के भाव और परंपरा समझने जापान के दो शोधार्थी वाराणसी पहुंचे हैं। उन्होंने लीला स्थल, प्रसंगों और करीब 200 साल पुराने छह टन वजनी रथ की बारीकियां जानीं। पांच मिनट की लीला में पांच लाख से अधिक लोगों की जुटान और यदुवंशियों की परंपरा ने उन्हें आकर्षित किया। दोनों 22 अक्तूबर को लीला देखेंगे।
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नाटी इमली भरत मिलाप मैदान में हुआ ऐतिहासिक आयोजन। - फोटो : अमर उजाला
काशी की 484 साल पुरानी नाटी इमली की विश्वप्रसिद्ध भरत मिलाप लीला पर शोध करने जापान से दो शोधार्थी काशी पहुंचे हैं। उन्होंने लीला स्थल, उसके ऐतिहासिक प्रसंगों और छह टन वजनी करीब 200 साल पुराने रथ की बारीकियों को जाना। पांच मिनट की लीला में लाखों लोगों की जुटान और यदुवंशी समाज की अनूठी परंपरा ने उन्हें खास तौर पर आकर्षित किया। जापानी शोधार्थी 22 अक्तूबर को होने वाली लीला के साक्षी भी बनेंगे। इसके अलावा दिल्ली से भी एक दल इस पर शोध करने काशी आएगा।
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नाटी इमली भरत मिलाप मैदान में हुआ ऐतिहासिक आयोजन। - फोटो : अमर उजाला
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में लोकपर्व का रूप ले चुकी भरत मिलाप और रामनगर की रामलीला पर देश-विदेश में शोध हो चुके हैं। इन आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। इसी क्रम में जापान के दो शोधार्थी मीनाटो और ताकेशी इंटरनेट पर भरत मिलाप लीला के दृश्य देखकर यहां पहुंचे हैं। 
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नाटी इमली मैदान में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की उतारी गई आरती। - फोटो : अमर उजाला
श्री चित्रकूट रामलीला समिति के व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि दोनों शोधार्थियों ने नाटी इमली मैदान का भ्रमण किया और वहां वीडियो व फोटोग्राफी की। आसपास के लोगों से बातचीत कर लीला के इतिहास और परंपराओं की जानकारी जुटाई। लीला में इस्तेमाल होने वाले रथ और अन्य सामग्रियों के बारे में भी जानकारी ली। शोधार्थियों को भरत मिलाप पर करीब 20 साल पहले लिखी गई पुस्तक और लीला की वीडियो क्लिप भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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नाटी इमली के पास चित्रकूट रामलीला समिति के लोग करते हैं पूजन। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में भी हुआ शोध
भरत मिलाप लीला को देखने और समझने के लिए अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड समेत कई देशों के लोग काशी आ चुके हैं। पं. मुकुंद उपाध्याय के अनुसार, विदेशी शोधार्थियों के लिए पांच मिनट में पांच लाख से अधिक लोगों का एक जगह जुटना आश्चर्य का विषय रहा है। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का किसी आयोजन के लिए एकत्र होना इस लीला को विशिष्ट बनाता है।
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भरत मिलाप में होती है लाखों की भीड़। - फोटो : संवाद
यदुवंशियों की परंपरा भी जानी
जापानी दल ने भरत मिलाप में यदुवंशी समाज की भूमिका और उसकी परंपरा को भी समझा। काशी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। यदुवंशी समाज के लोग भगवान श्रीराम के पुष्पक विमान रूपी रथ को अपने कंधों पर उठाकर लीला स्थल तक लाते हैं। करीब छह टन वजनी इस रथ को कंधों पर उठाकर ले जाने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण होता है। रथ पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और माता जानकी के साथ हनुमान, सुग्रीव, जामवंत और अंगद विराजमान होते हैं। लीला समिति के पदाधिकारी भी इसमें शामिल रहते हैं।
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काशी में भरत मिलाप का आयोजन। - फोटो : अमर उजाला
पांच मिनट की लीला में भावुक हो उठती है काशी
भरत मिलाप का सबसे भावुक दृश्य शाम करीब 4:40 बजे सामने आता है, जब अस्ताचलगामी सूर्य की किरणें मैदान में निर्धारित स्थान पर पड़ती हैं। इसी क्षण भरत और शत्रुघ्न अपने भाइयों के स्वागत में जमीन पर लेट जाते हैं। उधर, भगवान श्रीराम और लक्ष्मण उनसे मिलने के लिए दौड़ पड़ते हैं। चारों भाइयों का मिलन देखने के लिए उमड़ी भीड़ इस दृश्य की साक्षी बनती है। कुछ ही मिनटों में प्रेम, त्याग और भाईचारे का ऐसा भावपूर्ण दृश्य साकार होता है कि काशी की सांसें मानो थम जाती हैं। यही विशिष्टता भरत मिलाप को देश-विदेश के शोधार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है।
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