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राज्यपाल की सोच को बनारसियों ने किया साकार, 3 लाख छात्रों ने एक साथ पढ़ाई कर बनाया रिकार्ड

Tue, 10 Dec 2019 10:06 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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एक साथ पढ़ते छात्र - फोटो : a

बीते दिनों वाराणसी में एक शैक्षणिक कार्यक्रम में भाग लेने आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बच्चों में किताब पढ़ने की आदत बढ़ाने को लेकर बात कही थी, राज्यपाल की इसी सोच को साकार करने के लिए बनारस के आला अधिकारियों के जज्बे को बनारस के लोगों ने बखूबी परवान चढ़ाया।

मंगलवार को विभिन्न प्राइमरी स्कूलों से लेकर महाविद्यालयों तक के 3 लाख छात्रों और अध्यापकों ने "पढ़े बनारस बढ़े बनारस" मुहिम के तहत 1414 विद्यालयों में 3,56,448 छात्र-छात्राओं ने पढ़ने की आदत डालने के उद्देश्य से सामूहिक पढ़ाई की।

पढ़े बनारस बढ़े बनारस" कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय अर्दली बाजार में कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बच्चों संग पढ़ाई कर बच्चों में पढ़ने के प्रति उत्साह बढ़ाया। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा प्राथमिक विद्यालय घौसाबाद प्रथम, वरुणापार जोन, वाराणसी स्कूल पहुंचे और 11 बजे से 11:45 बजे तक बच्चों के साथ कक्षा में बैठ कर किताब पढ़ी।

 

 

 

 

 

 

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छात्रों के साथ कमिश्नर - फोटो : a

इस दौरान उन्होंने बच्चों से इस कार्यक्रम के बारे में पूछा और उद्देश्य बताते हुए कहा कि घर पर भी प्रत्येक सप्ताह में एक दिन निर्धारित कर एक घंटे कोर्स के अलावा अन्य कोई अच्छी व ज्ञान वर्धक या कहानी की किताबें पढ़ कर रीडिंग हैबिट डेवलप करें।

कहा कि अगले माह भी यह कार्यक्रम किया जाएगा। इस कार्यक्रम के बाद बच्चों से बातें कीं, बच्चों से स्वच्छता से सम्बंधित हाथ धोने के तरीके और उद्देश्य पर सवाल पूछे। दैनिक जीवन से जुड़ी अच्छी और बुरी आदतों की जानकारी पर अनेकों सवाल किए और बच्चों ने उसे " गुड हैबिट और बैड हैबिट" की पहचान कर जवाब दिये। 
 

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पुस्तकालय में पढ़ते छात्र - फोटो : a

हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पुस्तकालय में अभियान का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो ओपी सिंह ने कहा कि किताबों का कोई विकल्प नहीं हो सकता। ये न सिर्फ ज्ञान प्राप्ति के मार्ग को सुगम और सुदृढ़ करती हैं बल्कि इनसे लंबे समय तक व्यक्ति प्राप्त ज्ञान को याद भी रख सकता है।

आज के पेन लेस-पेपर लेस दौर में किताब और पुस्तकालय दोनों की समीचीनता उतनी ही है जितनी व्यक्ति के व्यक्तित्व की। हिंदी विभाग की डॉ ऋचा सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व विकास में किताबों का कोई सानी नहीं। ऑनलाइन स्टडी से ज्ञान और समझ का स्तर दोनों ही अल्पकालिक होता है।
 

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संस्कृत महाविद्यालय में स्वाध्याय करते बटुक - फोटो : a
दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय में "पढे़ बनारस बड़े बनारस" कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः दैनिक प्रार्थना के उपरांत 11:00 बजे से 11:45 बजे तक सभी कक्षाओं में होने घंटे शिक्षक एवं बटुकों ने एक साथ किताब लेकर अपने-अपने विषयों को पढ़ा।

सर्वप्रथम कार्यक्रम संयोजक साहित्य विभागाध्यक्ष आचार्य पवन शुक्ला ने छात्रों को प्रार्थना के उपरांत आयोजन के उद्देश्य से परिचित कराते हुए कहा कि स्वस्थ एवं सभ्य समाज के निर्माण के लिए शिक्षित होना जरूरी है।

 
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महाविद्यालय में पढ़ते छात्र व अध्यापकगण - फोटो : a
आवश्यक है कि इस प्रकार के आयोजन होते रहना चाहिए जिससे कि हम अपने समाज के साथ-साथ अपने परिवार को भी इस धारा से जोड़ सकें। पढ़ना हमारे जीवन का एक प्रमुख अंग है जिसके माध्यम से हम सब संस्कार से परिचित होते हैं अतः पढ़ने का अभ्यास मानव जीवन में निरंतर होना चाहिए। आज के इस आयोजन से छात्रों में भी काफी उत्साह का माहौल भी दिखा।
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