आजमगढ़ पत्नी-बेटे और दो पुजारियों की हत्या के मामले में जानकारी सामने आई है कि पिता की गोली से ही बच्चे की मौत हुई थी। डीजीपी ने आजमगढ़ पुलिस को सराहा है। घटना 22 सितंबर मंगलवार की शाम को हुई थी।
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Azamgarh Four murders
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने दो बच्चियों को सुरक्षित बचाने के लिए किए गए सुनियोजित ऑपरेशन और वारदात के बाद प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही मानवीय सहायता पर आजमगढ़ पुलिस की सराहना की है।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल फील्ड क्राफ्ट का परिचय दिया। साथ ही कर्तव्य से आगे बढ़कर प्रभावित परिवारों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई है। यही उत्तर प्रदेश पुलिस की वास्तविक पहचान है।
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वारदात के बारे में लोगों को बताता पंडितों के साथ आया युवक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस का दायित्व केवल अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़े रहना और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग देना भी है। दूसरी तरफ, पोस्टमार्टम के साथ ही बैलिस्टिक रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि पिता अरविंद सिंह की रिवॉल्वर से चली गोली से ही बेटे शौर्य सिंह की मौत हुई थी।
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मौके पर कमरा खुलवाने का प्रयास करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीजीपी कार्यालय के मुताबिक आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व घटनास्थल पर मौजूद एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोरा ने किया। डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह लगातार समन्वय और निगरानी करते रहे।
देर रात घर के भीतर से गोली चलने की आवाज आई तो बच्चों की जान पर तत्काल खतरे को भांपकर एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़ा।
अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग की तो जवाबी कार्रवाई की हुई। पुलिस ने दोनों बच्चियों को सकुशल बाहर निकाल लिया। अरविंद की तरफ से चलाई गई गोली ही 9 साल के शौर्य लगी थी। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी माैत हो गई।
आजमगढ़ के एसएसपी बच्चियों को देंगे एक महीने का वेतन
डीजीपी कार्यालय के मुताबिक बच्चियों के भविष्य के लिए पुलिस परिवार का सामूहिक सहयोग सराहनीय है। एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने अपने एक महीने का वेतन पीड़ित बच्चियों को देने का संकल्प लिया है। जिले के सभी पुलिसकर्मी अपना एक दिन का वेतन देंगे। यह राशि बच्चियों के नाम एफडी के रूप में जमा कराई जाएगी।
दोनों बच्चियों की शिक्षा एवं पालन-पोषण में सहयोग किया जाएगा। 11 वर्षीय बच्ची के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श दिलाया जाएगा। वारदात में अरविंद, उसकी पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौत के बाद परिवार में उसकी बुजुर्ग मां और दो बच्चियां ही रह गई हैं।
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Azamgarh
- फोटो : ANI
महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के परिजनों को भी मिलेगी सहायता
वारदात जान गंवाने वाले स्वर्गीय महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के परिजनों को शासन की पात्र योजनाओं की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस सिलसिले में एसएसपी आजमगढ़ ने जिलाधिकारी से बात की है। पुलिस दोनों परिवारों से आवश्यक जानकारी और बैंक खातों का विवरण प्राप्त कर जिला प्रशासन के माध्यम से सहायता दिलाने में सहयोग करेगी।
मृतकों के परिजनों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की कार्रवाई भी की जाएगी। इसी तरह अरविंद की दोनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाया जाएगा। अरविंद की बुजुर्ग मां को वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य पात्र सदस्यों को संबंधित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन से समन्वय किया जा रहा है।
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आजमगढ़ हत्याकांड में आरोपी अरविंद और पत्नी बबीता की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
शंभूपुर हत्याकांड : 2018 में भंडारे के दौरान हुई थी सुनील की हत्या, चार को हुई थी उम्रकैद
शंभूपुर हत्याकांड के पीछे आठ साल पुरानी हत्या की कहानी सामने आ रही है। 12 अक्तूबर 2018 को काली मंदिर पर मानस पाठ के बाद भंडारे के दौरान अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सुनील को छह गोलियां मारी गई थीं। इस मामले में चार दोषियों को निचली अदालत से उम्रकैद की सजा मिली थी।
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आजमगढ़ हत्याकांड के बाद अरविंद के भाई सुनील की बेटी ने दी मुखाग्नि
- फोटो : अमर उजाला
बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिली तो दोषी जेल से बाहर आ गए। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद दोषी तरह-तरह की टिप्पणी करते थे। टिप्पणी से अरविंद और उसका परिवार परेशान रहता था। मां श्यामला देवी ने बताया कि जब सुनील की गोली मारकर हत्या की गई थी तब अरविंद भी मौके पर मौजूद था। उसके मन में डर समाया था। बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहता था।
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आजमगढ़ हत्याकांड के बाद पुलिस का पहरा
- फोटो : अमर उजाला
उसे आशंका थी कि विरोधी उसके बेटे-बेटियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अरविंद अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी डरता था। अक्सर रिवॉल्वर साथ लेकर चलता था। इससे पहले 2016 में सुनील सिंह ने पड़ोसियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 20 सितंबर 2017 को अरविंद के अपहरण और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
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आजमगढ़ हत्याकांड के बाद परिवार में पसरा मातम
- फोटो : अमर उजाला
महेंद्र पाठक से परिचित था अरविंद, अखिलेश को नहीं जानता था
पूजा कराने पहुंचे पुरोहित महेंद्र पाठक अरविंद के परिचित थे। घनिष्ठता भी थी। करीब एक महीने पहले अरविंद की एक गाय महेंद्र को देने और कुछ दिन पहले पांच बिस्वा जमीन की बिक्री में महेंद्र की मध्यस्थता की बात भी सामने आई है। वहीं, पूजा में पहुंचे पंडित अखिलेश मिश्रा और उनके बेटे हिमांशु मिश्रा से अरविंद की पहले से पहचान नहीं थी।
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अस्पताल में बच्ची से बात करते एएसपी अनिल कुमार
- फोटो : अमर उजाला
इसी वजह से अरविंद ने दोनों से आधार कार्ड मांगा था। परिजनों का दावा है कि अरविंद उनकी पहचान की पुष्टि करना चाहता था। आशंकित था कि कहीं दोनों को किसी साजिश के तहत तो नहीं भेजा गया। अरविंद ने महेंद्र और अखिलेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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आजमगढ़ हत्याकांड के बाद पुलिस का पहरा
- फोटो : अमर उजाला
सांसद के सामने भी परिजनों ने उठाया 2018 का मामला
सपा सांसद दरोगा सरोज और सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव के सामने भी सुनील सिंह की बेटियों ने वर्ष 2018 की हत्या का मुद्दा उठाया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के दोषी लंबे समय से जेल से बाहर हैं। परिवार को लगातार भय बना हुआ था। उन्होंने परिवार से जुड़े अन्य मामलों और चचेरे भाई शौर्य उर्फ लक्खा की हत्या का जिक्र भी किया।
आजमगढ़ में घटना के बाद मौके पर पुलिस
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अब घर में ताला, गांव में पसरा सन्नाटा
शंभूपुर में अरविंद सिंह के मकान के दरवाजे पर ताला लगा है। पुलिस की निगरानी में लगी है। परिवार के सदस्य अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय परी और 11 माह की शांभवी को लेने के बाद गांव से चले गए हैं। घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के अलावा कोई हलचल नहीं है। जिस घर में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान की तैयारी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।