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अब्दुल हमीद का शहादत दिवस, ऐसा योद्धा जिसने अकेले ही दुश्मनों के टैंकों को किया था ध्वस्त  

Tue, 11 Sep 2018 10:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
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abdul hamid - फोटो : amar ujala
यूपी में गाजीपुर की धरती पर जन्मे वीर अब्दुल हमीद को सोमवार को उनके 53वें शहादत दिवस पर याद किया गया। जिले के धामूपुर में परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद श्रद्धांजलि अर्पित करने आए मुख्य अतिथि 39 जीटीसी के कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर एचएस बंसल ने कहा कि आपका प्रेम और सेना के प्रति लगाव हमें तमाम मुश्किलों की घड़ियों में ताकत देता है। हमें विश्वास रहता है कि हमारे पीछे देश खड़ा है और देशवासियों की दुआएं हमारे साथ हैं। इसीलिए हम सीमा पर जी-जान लगा कर लड़ते हैं। धन्य है, यह धरती जिसने वीर सपूत अब्दुल हमीद को जन्म दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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abdul hamid - फोटो : amar ujala
यहां के लोगों में देश सेवा के जज्बे को देखते हुए आगामी अप्रैल माह तक गाजीपुर के जवानों के लिए स्पेशल भर्ती कार्यक्रम रखा जाएगा। ऐसे वीर सपूत की धरती पर आने से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। यह अब्दुल हमीद के प्रति प्रेम ही तो है कि गाजीपुर की धरती से सेना में जाने के लिए युवाओं की बड़ी फौज हमेशा तैयार रहती है। अगर संभव हुआ तो अप्रैल 2019 में गाजीपुर के नौजवानों के लिए स्पेशल सेना भर्ती मेला का आयोजन कराया जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत की ओर से पत्र के माध्यम से भेजे गए संदेश को पढ़ कर सुनाया। रसूलन बीबी को संबोधित इस पत्र में जनरल रावत ने परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। 
 
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abdul hamid - फोटो : amar ujala
विशिष्ट अतिथि नेता अमर सिंह ने कहा कि शहीदे आजम अब्दुल हमीद की जन्मस्थली एक तीर्थ स्थली से कम नहीं। उत्कर्ष और बलिदान की कोई सीमा नहीं होती। इसमें एक शहीद जीवन मरण से ऊपर हो जाता है। ऐसे में हम यह कतई नहीं कर सकते कि अब्दुल हमीद मर चुके हैं। आज वह करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। अब्दुल हमीद ने राष्ट्रधर्म की लड़ाई लड़ी थी। हिंदुस्तान के लिए जीने मरने वाले राष्ट्र में सर्वोपरि होते हैं। राष्ट्रधर्म के लिए जितने भी युद्ध हुए हैं उसमें सभी राष्ट्र धर्म के लिए लड़ने वाले पूजनीय हैं। 

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abdul hamid - फोटो : amar ujala
पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने कहा वीर अब्दुल हमीद जैसे योद्धा को नमन करता हूं। जिनकी वजह से जंग में दुश्मनों को करारी हार का सामना करना पड़ा। आज के युवा साथी हमीद से प्रेरणा लेकर देश सेवा में लगे रहें। देश से बढ़ कर कोई सेवा नहीं है। 
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abdul hamid - फोटो : amar ujala
जिला पंचायत सदस्य डा. प्रतिमा सिंह ने कहा कि आज के युवा सच्ची देशभक्ति की लगन जगाए। देश सेवा करने वाले को कभी विस्मित नहीं किया जा सकता है। इसके पूर्व ब्रिगेडियर एचएस बंसल ने मंच पर रसूलन बीबी को साल ओढ़ा कर सम्मानित किया तथा एक लिफाफा सौंपा। सभी आगंतुकों ने हमीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।
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दुल्लहपुर के धामूपुर गांव में परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर हमीद पार्क में रखी आरसीएल गन।
बता दें कि आठ सितंबर की रात अब्दुल हमीद पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। इसी मोर्चे पर पाकिस्तान ने अपने अपराजेय माने जाने वाले टैंक अमेरिकन पैटन को लड़ाई में उतारा। पाक के इन टैंकों ने खेमकरण सेक्टर में हमला कर दिया। देश के वीर सपूत अब्दुल हमीद ने भी भारतीय सैनिकों के साथ मोर्चा संभाला। अब्दुल हमीद के पास बुलंद हौंसलों के सिवाए कोई हथियार नहीं था। हमीद बिना अपनी जान की परवाह किए पाकिस्तानी टैंकों के सामने खड़े हो गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ गन माउनटेड जीप थी। 
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धामूपुर शहीद पार्क में रखी वीर अब्दुल हमीद की आरसीएल गन ।
उन्होंने अपने अनुभव से पाक टैंकों की कमजोरी का पता लगा लिया। हमीद ने अकेले ही पाकिस्तान के सात टैंकों को ध्वस्त कर दिया। हमीद और उनके साथियों के हौसले के सामने पाक सैनिक ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और वापस लौटने को मजबूर हो गए। वीर हमीद यहां भी नहीं रुके, वो वापस भाग रहे पाक सैनिकों का पीछा करने लगे। इसी दौरान उनकी जीप पर एक बम का गोला आ गिरा। इसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। 10 सितंबर को वे शहीद हो गए। 
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