कण-कण शंकर की नगरी काशी ने ही देश को रामलीला का अनुष्ठान दिया। काशी ने आज भी 480 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा को अपने आंगन में सहेज रखा है। मेघा भगत ने 480 साल पहले चित्रकूट की रामलीला की शुरुआत की, जो रामचरित मानस से भी अधिक प्राचीन है। नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि बनारस की रामलीला तुलसीदास के रामचरित मानस लिखे जाने से पहले से होती आ रही है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 1908 के फैसले में लिखा है कि चित्रकूट रामलीला के संचालक मेघा भगत सन 1543 में विद्यमान थे और मानस की रचना 1576 में पूरी हुई है। मेघा भगत की रामलीला वाल्मीकि नारायण और हनुमन नाटक से प्रेरित थी। उनकी लीलाएं वैष्णव मंदिर की झांकियों से प्रेरित थीं।
रामलीला का मंचन ही है, जहां राम व कृष्ण और राम व शिव एकाकार हो जाते हैं। राम आते हैं तो हर-हर महादेव का उद्घोष होता है। साल भर राधे-राधे कहने वाले वैष्णवजन महीने भर के लिए रामजी को ठाकुरजी मान लेते हैं। भले ही सबसे अधिक प्राचीन रामलीला का गौरव चित्रकूट और लाटभैरव की रामलीला को जाता है लेकिन रामनगर की लीला का सम्मोहन व आकर्षण कहीं और नजर नहीं आता है। मेघा भगत की लीला जहां झांकी प्रधान थी वहीं तुलसी की रामलीला संगीतमय स्वरूप होती है।