कन्नौज के शहीद हरिओम लोधी के पार्थिव शरीर में लिपटे तिरंगे को जैसे ही पिता रामबहादुर को सौंपा गया, तो वह फफक पड़े। कंपकंपाते हाथों से तिरंगे को चूमकर माथे से लगा लिया। रोते बिलखते पिता व अन्य परिजनों को जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने ढांढस बंधाया। इसके बाद भी उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
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शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लगी लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
नम आंखों से बड़े भाई हरिश्चंद्र ने शहीद को मुखाग्नि दी। शुक्रवार को हरिओम का पार्थिव शरीर उसके आवास पर पहुंचा। ताबूत पर लगी हरिओम की फोटो को सीने से लगाकर मां सुमन देवी रोने लगीं। बहन बसंती, भागवती, रूपकली व शशि का भी कुछ ऐसा ही हाल था।
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शहीद को नम आंखों से दी गई विदाई
- फोटो : अमर उजाला
तीन दिन से लगातार रो रही बहनों और भाई की आंखें हरिओम का पार्थिव शरीर देखकर नम हो गईं। सभी शव से चिपटकर बिलख पड़े। रामबहादुर लोधी के आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान मां और पिता समेत अन्य परिजनों को रोता-बिलखता देख गांव की महिलाएं की आंखें भी भर्र आइं।
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विशेष विमान से लाया गया शहीद का पार्थिव शरीर
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 21 जनवरी को कोलकाता के पोर्ट ब्लेयर में सर्च आपरेशन पर निकले विशुनगढ़ क्षेत्र के नगला डांडे गांव निवासी ेहरिओम लोधी की नौका समुद्र में पलट गई थी। इस नौका पर सवार पांच सैनिक समुद्र में डूब गए थे। बचाव दल ने चार सैनिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया था, लेकिन हरिओम शहीद हो गए थे।
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शहीद को सलामी देते सैनिक
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के सम्मान में बंद रहे विद्यालय
शहीद हरिओम के सम्मान में कस्बे के सभी निजी विद्यालय बंद रहे। हरिओम ने कक्षा आठ तक की पढ़ाई कस्बे के गंगा एजूकेशन सेंटर से की थी। इसके बाद कक्षा नौ से इंटरमीडिएट की पढ़ाई छिबरामऊ के सुभाष अकादमी से की थी। हरिओम ने स्नातक के लिए कस्बे के ही एक डिग्री कालेज में प्रवेश लिया था। यहां पढ़ाई के दौरान ही फरवरी 2018 में उसका नेवी में चयन हो गया था। कस्बे के निजी विद्यालय संचालकों ने शहीद के सम्मान में शोक सभा के बाद अवकाश घोषित कर दिया।
शहीद को सलामी देते पुलिस ऑफीसर और जन प्रतिनिधि
- फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार के बाद खुला बाजार
कन्नौज के लाड़ले की शहादत के सम्मान में कस्बे के लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। साथ ही शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अंतिम संस्कार के बाद लोगों ने अपनी दुकानें खोली। शहीद के पिता राम बहादुर उर्फ दामोदर लोधी भी कस्बा विशुनगढ़ में परचून की दुकान हैं।