विलाप करते परिजन।
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हमें क्या पता था कि शव बनकर आएंगे वापस
परिजनों व ग्रामीणों जाबिर राणा, डॉ. समरयाब, कंवर, आरिफ, जुबेर राणा, शौकत अली, आशीष सैनी, विजेंद्र, सुभाष, जयपाल ने बताया कि इन दिनों खेतों में फसल खड़ी है। इसके चलते पेड़ों की कटाई का काम बंद है, जिस किसान का खेत खाली हो जाता है, वही पेड़ों की कटाई कराता है। पिछले 15 दिन से काम न मिलने के चलते गांव में पापुलर कटाई करने वाले मजदूर खाली बैठे थे। शनिवार को मजदूरों को ठेकेदार गांव मदनूकी लेकर गया था। उन्हें क्या पता था कि वहां उनके बच्चों की मौत उनका इंतजार कर रही है। रो-रोककर परिजन बोल रहे थे कि हमें क्या पता था कि तीनों शव बनकर आएंगे।