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आईएएस के भाई ने आखिर क्यों उठाया खौफनाक कदम, उठ रहे ये बड़े सवाल, जल्द खुलेगा राज

Tue, 19 Jan 2021 05:13 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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मृतक अंकुर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव आईएएस लव अग्रवाल के छोटे भाई एवं युवा उद्यमी अंकुर अग्रवाल की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, पुलिस ने भी मौत का कारण जानने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से पुलिस के लिए खुलासा करना बड़ी चुनौती होगा।
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सुसाइड केस - फोटो : अमर उजाला
उठ रहे कई बड़े सवाल
इतना बड़ा नाम, कारोबार और रुतबा। फिर अंकुर ने क्यों उठाया यह कदम। सहारनपुर शहर के दिल्ली रोड स्थित ग्रीन पार्क से लेकर जिला अस्पताल में मौजूद रहे पड़ोसियों और अन्य लोगों की जुबां पर यही सवाल था। खुदकुशी की वजह को लेकर कारोबार में उतार चढ़ाव से बने तनाव सहित अन्य चर्चाएं जरूर रहीं, लेकिन परिवार के लोग कुछ भी स्पष्ट बताने से इनकार करते रहे।
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सुसाइड केस - फोटो : amar ujala
ऐसे मिली जानकारी
सरसावा थाना पुलिस को सोमवार अपराह्न करीब तीन बजे परिजनों ने कॉल कर सूचना दी कि अंकुर दोपहर 12 बजे फैक्टरी गए थे, लेकिन उसके बाद फोन पर संपर्क नहीं हो रहा है। पुलिस ने छानबीन शुरू की और अंकुर के मोबाइल फोन की लोकेशन निकलवाई जो पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में मिली। पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचकर छानबीन कराई तो अंकुर का शव उनकी फैक्टरी के पास ही खेत में मिला। शव के पास ही लाइसेंसी पिस्टल भी था। अंकुर के पिता केजी अग्रवाल चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में प्रथम मेटल के नाम से इनकी फैक्टरी है। 

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कार - फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल में परिवार से जुड़े और कुछ अन्य लोगों ने बताया कि कुछ समय से अंकुर परेशान तो लगे, मगर वे ऐसा कदम उठा लेंगे, इसका अंदाजा नहीं था। वहां मौजूद लोगों में आर्थिक स्थिति के कारण ऐसा करने और इससे पहले भी एक बार खुदकुशी का प्रयास करने की चर्चा रही। यह भी चर्चा रही कि कुछ दिन पहले ही जीएसटी की एसआईबी ने इनकी फैक्टरी पर सर्वे किया था, जिसमें कई लाख रुपये का टैक्स लगाया था। वहीं, शव का पंचनामा भरवाने वालों में शामिल रहे विकास अग्रवाल ने कहा कि अंकुर ने आत्महत्या की है। उन्हें किसी पर कोई शक नहीं है और न ही परिवार कोई कार्रवाई चाहता है।
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सुसाइड केस - फोटो : amar ujala
बेटे के नाम पर है पिलखनी में फैक्टरी  
उद्यमी अंकुर अग्रवाल की पिलखनी में फैक्टरी उनके बेटे प्रथम के नाम पर है। इसमें बैटरी से जुड़ा काम किया जाता है। ग्रीन पार्क कॉलोनी में उनके आवास पर कुछ पड़ोसियों ने बताया कि अंकुर अक्सर दिन में 11 से 12 बजे के आसपास यहां से निकलते थे। सोमवार को भी दोपहर में ही गए थे। इसके बाद वे तो नहीं लौटे उनका शव ही यहां पहुंचा। वे हैरान रहे कि यह सब कैसे हो गया।
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सुसाइड केस - फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी में काफी देर टहलते रहे अंकुर 
अंकुर अग्रवाल घर से ड्राइवर के साथ कार से पिलखनी स्थित अपनी फैक्टरी पहुंचे थे। कार को फैक्टरी के बाहर ही लगवाया और ड्राइवर से कहा तुम चले जाओ मैं खुद आ जाऊंगा। अंकुर ने ऐसा क्यों कहा, ड्राइवर को भी इसका आभास नहीं था, लेकिन अंकुर के दिमाग में चल रही उधेड़बुन और तनाव उन्हें घेरे जा रहा था। यही वजह थी कि काफी देर तक अंकुर फैक्टरी के आसपास ही टहलते रहे। इसका पता सीसीटीवी से भी चला। दरअसल, अंकुर अग्रवाल दिल्ली रोड स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी से दोपहर करीब 12 बजे के बाद फैक्टरी के लिए निकले, तब उनके साथ ड्राइवर भी था।
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मौके पर जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सर... क्या आदेश है... क्या करना है
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव आईएएस लव अग्रवाल के छोटे भाई होने के कारण अंकुर अग्रवाल के शव के पोस्टमार्टम से लेकर अन्य कार्रवाई में स्थानीय अफसर लगातार फोन पर व्यस्त रहे। अफसरों से यही पूछते रहे - सर... क्या आदेश है... क्या करना है।

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