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रामपुर तिराहा कांड: दोषी सिपाहियों को उम्रकैद, अर्थदंड भी लगाया, अदालत ने जलियांवाला बाग से की प्रकरण की तुलना

Mon, 18 Mar 2024 03:50 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला
रामपुर तिराहा कांड में तीन दशक बाद फैसले की घड़ी आ गई। अदालत में पीएसी के दो सिपाहियों पर दोष सिद्ध हो गया। सजा के प्रश्न पर आज सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों दोषी सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।

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मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेशी पर पहुंचे रामपुर तिराहा कांड के आरोपी और अन्य।
चर्चित रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और साजिश रचने के मामले में अदालत ने आखिरकार फैसला सुना दिया। पीएसी के दो सिपाहियों पर 15 मार्च को दोष सिद्ध हो चुका  था। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की और दोनों दोषी सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषियों पर 40 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है।

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आरोपियों को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा और उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि सीबीआई बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अभियुक्त मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप सिंह पर दोष सिद्ध हुआ था।

दोषियों को किस धारा में क्या सुनाई गई सजा
लंच के बाद सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। सीबीआई की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। दोनों अभियुक्तों पर धारा 376जी, 323, 354, 392, 509 व 120 बी में दोष सिद्ध हुआ था। दोषी मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को धारा 376 (2) (जी) में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

धारा 392 में सात साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 354 में दो साल का कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 509 में एक साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।  दोनों दोषियों पर कुल अर्थदंड एक लाख रुपये लगाया गया है। अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि बतौर प्रतिकर  पीड़िता को दी जाएगी।

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रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला
अदालत ने दोषियों को लगाई लताड़, जलियांवाला बाग से प्रकरण की तुलना
आज सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस कांड को जलियावाला बाग जैसी घटना के तुलना की। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने कई मामलों में वीरता का परिचय दिया प्रदेश का मान सम्मान बढ़ाया, लेकिन यह देश और न्यायालय की आत्मा को झकझोर देने वाला प्रकरण है।

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रामपुर तिराहा गोलीकांड
अदालत ने कहा- मानवता को शर्मसार करने वाली घटना
चर्चित रामपुर तिराहा कांड में फैसला देते हुए अपर जिला जल शक्ति सिंह ने लिखा कि महिला आंदोलनकारी के साथ बर्बरता व अमानवीय व्यवहार किया गया है। शांतिपूर्ण आंदोलन में नियमों के अधीन रहते हुए भाग लेना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। इस मौलिक अधिकार के हनन के लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसा पाश्विक कृत्य कारित करने का अधिकार प्राप्त नहीं है, एवं ऐसा व्यक्ति यदि पुलिस बल का है तब यह अपराध पूरी मानवता को शर्मसार कर देने वाला है।
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रामपुर तिराहा गोलीकांड
सहानुभूति के लायक नहीं दोषी सिपाहियों का आचरण: न्यायालय
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध करने वाले कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि उनके कंधों पर आमजन की हिफाजत की जिम्मेदारी थी।  ऐसा व्यक्ति यदि स्वयंत दुष्कर्म जैसी घटना में शामिल होता है तो यह पूरी व्यवस्था के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। उत्तर प्रदेश पुलिस बल देश का सबसे बड़ा पुलिस बल है, जिसने अनेक जांबांज पुलिस अधिकारी दिए हैं। लेकिन जिस प्रकार का आचरण दोषी सिपाहियों द्वारा दिखाया गया है वह उनको इस न्यायालय की किसी भी प्रकार की सहानुभूति से वंचित कर देता है। उनका यह कृत्य सम्पूर्ण जनमानस  व इस न्यायालय की आत्मा को झकझोर देने वाला है और आजादी से पूहले हुए जलियांवाला बाग की घटना को याद दिलाती है।

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रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 की रात अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। इनमें महिला आंदोलनकारी भी शामिल थीं। रात करीब एक बजे रामपुर तिराहा पर बस रूकवा ली। दोनों दोषियों ने बस में चढ़कर महिला आंदोलनकारी के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म किया।

पीड़िता से सोने की चेन और एक हजार रुपये भी लूट लिए थे। आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे।
 
यहां के रहने वाले हैं दोनों दोषी
पीएसी गाजियाबाद में सिपाही मिलाप सिंह मूल रूप एटा के निधौली कलां थाना क्षेत्र के होरची गांव का रहने वाला है। दूसरा आरोपी सिपाही वीरेंद्र प्रताप मूल रूप सिद्धार्थनगर के थाना पथरा बाजार के गांव गौरी का रहने वाला है।
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जानकारी देते राजीव शर्मा, डीजीसी फौजदारी - फोटो : अमर उजाला
कई मामले में सजा सुना चुके हैं अपर जिला जज शक्ति सिंह
बता दें कि रामपुर तिराहा कांड पर फैसला सुनाने वाले अपर जिला जज शक्ति सिंह जनपद के कई चर्चित मामलों में निर्णय सुना चुके हैं। उन्होंने बेबी किलर के नाम से मशहूर कुख्यात अपराधी शाहनवाज उर्फ प्लास्टिक को जिसने जेल के लॉकअप की गाड़ी में सहबंदियों का गला रेत दिया था, को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा न्यायधीश कई ड्रग माफियाओं को भी इस न्यायालय से सजा सुना चुके हैं।
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