मुरादाबाद के बिलारी के मुंडिया जैन गांव के रहने वाले छह मजदूरों की देहरादून में बारिश से हुई तबाही में मौत हो गई। जान गंवाने वालों में से तीन तो एक ही परिवार के हैं जबकि अन्य तीन गांव के अलग-अलग मोहल्लों के हैं।
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देहरादून में बारिश से तबाही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून में नदी में छह मजदूरों की डूबने से हुई मौत ने मुंडिया जैन गांव को झकझोर दिया है। शाम ढलते ही गम में डूबे इस गांव की गलियां सूनी पड़ गईं। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। वहीं तीन मजदूर अभी भी लापता हैं। मंगलवार दोपहर बाद प्रशासन के माध्यम से मुंडिया जैन गांव में इस हादसे की खबर पहुंची तब अधिकतर ग्रामीण गांव मंदिर पर जमा हो गए और हादसे की सत्यता को लेकर जानकारी जुटाने में लग गए।
गांव के युवा दुर्घटना से संबंधित आई वीडियो अपने मोबाइल पर एक दूसरे को दिखाने लगे। हादसे की जानकारी हुई तो मंगलवार देर शाम तक रिश्तेदार मुंडिया जैन गांव में पहुंचते रहे। परिजनों को ग्रामीण यह कहकर और समझा बुझाकर शांत करते रहे कि अभी सभी जीवित हैं और देहरादून के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
जान गंवाने वालों में से तीन तो एक ही परिवार के हैं जबकि अन्य तीन गांव के अलग-अलग मोहल्लों के हैं। ऐसी स्थिति में पूरा मुंडिया जैन गांव शोक में डूब गया। शाम को छोटे बच्चे गांव की गलियों में घूमकर खेलने की बजाए अपने घरों में गुमसुम बैठे हुए नजर आए। गांव की कई महिलाओं से बात करने पर पता चला कि उन्होंने अपने घरों में शाम को खाना ही नहीं बनाया है। वहीं मुड़िया जैन गांव निवासी विक्रम, अर्जुन, आकाश, विशाल, मनोज और दीपक आदि भी देहरादून के पास रहकर काम करते थे।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
अपने-अपने परिवार के साथ परवल में ही रहते थे मजदूर
उत्तराखंड के देहरादून में मुंडिया जैन गांव निवासी सभी मजदूर अपने परिवार की गुजर बसर का मुख्य सहारा थे। हादसे के समय मदन के साथ ही उनकी पत्नी सुंदरी लापता है। मदन के तीन बेटे और एक बेटी है। नरेश के परिवार में पत्नी सावित्री के अलावा तीन बेटियां और एक बेटा है।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
हरचरन के साथ हादसे में उनकी पत्नी सोमवती और बहू रीना की भी मौत हुई है। हरचरन के पांच बेटे और तीन बेटियां हैं जबकि रीना का एक बेटा और एक बेटी है। किरन के पति अमरपाल इस हादसे में चोटिल होकर अस्पताल में भर्ती हैं।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
हादसे ने छीन लीं हरचरन के परिवार की खुशियां
बिलारी में देहरादून नदी बाढ़ हादसे ने मुंडिया जैन गांव निवासी मजदूर हरचरन के परिवार की तो सभी खुशियां छीन लीं। हादसे में सर्वाधिक नुकसान इसी परिवार का हुआ है। हरचरन और उसकी पत्नी सोमवती व पुत्रवधु रीना की जहां मौत हो चुकी हैं
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
वहीं हरचरन के दोनों बेटे राजकुमार और होराम नदी में आई बाढ़ के पानी में बह गए हैं जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। दूसरा बढ़ा नुकसान मजदूर मदन के परिवार को हुआ है मदन की जहां स्वयं इस हादसे में मौत हुई वहीं मदन की पत्नी सुंदरी घटनास्थल पर बह जाने के बाद अभी तक लापता है।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
सोमवार शाम परिजनों से हुई थी बात
बिलारी में जान गंवाने वाले मजदूरों ने सोमवार की शाम अपने अपने परिजनों से मोबाइल पर बात की थी। किरन के ससुर गिरवर सिंह ने रोते हुए बताया कि उसका बेटा अमरपाल और पुत्रवधु दोनों ही मजदूरी करने अन्य ग्रामीणों के साथ गए थे। सोमवार शाम ही उनकी पुत्रवधु किरन से फोन पर बात हुई थी और हाल चाल जाना था।
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देहरादून में बादल फटने से ट्रैक्टर सवार मुरादाबाद निवासी बहे
- फोटो : वीडियो ग्रैब
मदन की मां भगवानदेई ने बताया कि उनकी अपने बेटे मदन और पुत्रवधु सुंदरी से सोमवार सुबह फोन पर बात हुई थी। नरेश की भाभी रामवती ने बताया कि उनकी अपने देवर नरेश से दो दिन पहले फोन पर बात हुई थी। परिजनों की हुई यह बात ही आखिरी बात होकर रह गई।
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सहस्त्रधारा में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान नदी उफान पर आने से क्षतिग्रस्त हुई कारें
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रक्षाबंधन मनाकर चले गए थे सभी मजदूर, अब दिवाली पर थे आने की तैयारी
बिलारी के मुंडिया जैन गांव के मजदूर परिवारों के सदस्य स्थानीय स्तर पर मजदूरी न मिलने की वजह से बीते कई वर्ष से उत्तराखंड राज्य के अलग अलग इलाकों में जाकर काम करते थे। मदन के परिवार के सदस्य सबसे पहले उत्तराखंड गए थे। उन्हीं के अनुभव और जानकारी के बाद गांव के अन्य मजदूर भी उनके साथ जाने लगे।
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गढ़ी कैंट में नदी उफान पर आने से क्षतिग्रस्त हुई इंदिरानगर गल्जवाड़ी क्षेत्र की ओर जाने वाला मार्ग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों से जानकारी करने पर पता चला कि सभी मजदूर परिवारों ने बीता रक्षाबंधन का पर्व अपने गांव में मुंडिया जैन में ही मनाया था और आगामी दिवाली के त्योहार से पहले वापस गांव लौटने की योजना बना चुके थे। सभी को अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ मुंडिया जैन गांव में आकर दिवाली का त्योहार मनाना था।
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तेज बारिश के कारण उफान पर आई प्रेमनगर नंदा की चौकी के समीप से बहने वाली टौंस नदी पर बना पुल हुआ क्ष
- फोटो : राजीव गुप्ता
एक हजार से ज्यादा लोग फंसे थे सुबह
बारिश के चलते पुल और सड़कों के टूटने से एक हजार से अधिक लोग अलग-अलग जगह फंसे हुए थे। इन्हें एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू कर निकाला। इनमें सिंघनीवाला में एक, मसंदावाला में चार, ठाकुरपुर में एक, सहस्रधारा रोड पर चार, हेरिटेज होटल मसूरी में आठ, लिटिल हैवन होटल मसूरी में 15, पंचकूली रायपुर में 30, डालनवाला एमडीडीए कॉलोनी क्षेत्र में 20, सेरकी में छह, देवभूमि इंस्टीट्यूट पौंधा में 500 और परवल प्रेमनगर में 10 लोगों के फंसे होने की सूचना पुलिस व आपदा कंट्रोल रूम को मिली थी।
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जान बचाने के लिए पोल पर चढ़े युवक को बचाते हुए एनडीआरएफ जवान
- फोटो : पीटीआई
जान बचाने के लिए बिजली के खंभे पर चढ़ा युवक
आसन नदी में अचानक तेज बहाव में कई लोग फंस गए। इनमें से एक युवक वहां बिजली के खंभे पर चढ़ गया। मौके पर एनडीआरएफ की टीम पहुंची और युवक को खंभे से उतारा। गनीमत यह रही कि उस वक्त खंभे में बिजली का करंट नहीं दौड़ा। एनडीआरएफ ने झाझरा क्षेत्र से ऐसे कई लोगों को पानी के बहाव से निकाला।
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सहत्रधारा में बादल फटने से नदी का जलस्तर बढने से हुए नुकसान को देख निराश होता स्थानीय बुजुर्ग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसडीएम के साथ राजस्व अमले ने गांव में पहुंचकर जुटाई जानकारी
एसडीएम बिलारी विनय कुमार सिंह के साथ नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की टीम ने मंगलवार शाम मुंडिया जैन गांव पहुंचकर हादसे से संबंधी जानकारी जुटाई। राजस्व टीम ने परिजनों से परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई।
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देर रात सहत्रधारा में बादल फटने से टुटी सड़क से गुजरते बुजुर्ग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसडीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा अपने स्तर से मृतकों के आश्रितों को आर्थिक मदद देने की घोषणा कर दी गई है। स्थानीय स्तर पर राजस्व अभिलेखों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि मृतकों में कौन भूमिहीन थे और किनके पास कितनी भूमि थी। शासन और प्रशासन के निर्देश पर सभी मृतकों के आश्रितों को तत्काल उचित आर्थिक सहायता दिलाने के लिए राजस्व टीम द्वारा पत्रावली तैयार की जा रही है।
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ग्रामीणों से घटना की जानकारी लेते एसडीएम और भाजपा नेता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भाजपा नेता सुरेश सैनी समेत अनेक पदाधिकारी पहुंचे मुंडिया जैन गांव
भाजपा नेता सुरेश सैनी हादसे की जानकारी मिलते ही मुंडिया जैन गांव पहुंच गए। उनके साथ नगर पंचायत महमूदपुर माफी के अध्यक्ष प्रतिनिधि मंगलसेन सैनी, भाजपा के महमूदपुर मंडल अध्यक्ष रविपासी, बिलारी मंडल अध्यक्ष विकास गुप्ता, रचित माथुर, मनोज ठाकुर आदि के अलावा सैनी समाज बिलारी के कई पदाधिकारी भी पहुंचे। हादसे में मृतक सभी मजदूर सैनी जाति के होना बताए जा रहे हैं। मुंडिया जैन गांव भी सैनी जाति बाहुल्य माना जाता है। भाजपा नेताओं ने मृतक मजदूरों के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मिलकर गहरी शोक संवेदना जताई।
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देर रात सहत्रधारा में बादल फटने से नदी के बढ़े जलस्तर और नुकसान को देखते स्थानीय लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन दोस्तों के नदी में बहने से गांव में मातम
देहरादून में बदल फटने से तेज बहाव में बहे तीनों दोस्तों से गांव रहरा में मातम है। इनमें से एक का शव मिल चुका है जबकि दो की तलाश जारी है। मंगलवार सुबह मौके से फोन पर परिजनों को जानकारी हुई जिसके बाद कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। तीनों के परिजनों को रो-रोकर बुरा है। रिश्तेदार व ग्रामीण उन्हें सांत्वना दे रहे है। उधर, जानकारी होते ही तीनों के परिवार वाले व अन्य लोग देहरादून के लिए रवाना हो गए।
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गढ़ी कैंट स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर में तमसा नदी उफान पर आने के बाद डूबी हनुमान की मूर्ति
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हसनपुर के नजदीकी गांव रहरा और आसपास के गांव के रहने वाले 11 मजदूर रक्षाबंधन के दो दिन बाद देहरादून क्षेत्र के बाजावाला में मजदूरी करने गए थे। उनके परिजनों ने बताया कि स्पना नदी से बजरफुट निकाला जा रहा था। यह मजदूर इसी काम में लगे थे।
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देहरादून में लापता लोगों की परिजन
- फोटो : संवाद
मंगलवार तड़के भारी बारिश और बादल फटने से रहरा निवासी मजदूर पुष्पेंद्र (20), पीतम (22) और पंकज (27) बह गए। मौके से फोन पर परिजनों को मामले की जानकारी किसी ने दी। बताया कि पंकज का शव मिल गया है। अन्य की तलाश की जा रही है। यह खबर सुनते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।
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गढ़ी कैंट इंदिरानगर गल्जवाड़ी क्षेत्र में नदी उफान पर आने से क्षतिग्रस्त हुई सड़क से नीचे गिरी बस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों ने बताया कि यह तीनों दोस्त बहुत ही मेहनती थे और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर जाते रहते थे। उनकी आकस्मिक मौत की खबर से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी दूर जाकर उनके साथ ऐसा हादसा हो जाएगा। गांव में चारों तरफ खामोशी और उदासी छाई हुई है। परिजनों का कहना है कि नदी के तेज बहाव के कारण तलाशी अभियान में दिक्कतें आ रही हैं।
दो माह पहले हुई थी पंकज की शादी
देहरादून में नदी में बादल फटने से नदी में बहने वाले लोगों में पंकज का शव करीब 70 किमी दूर जाकर मिला। बताते हैं कि पंकज की करीब दो माह पहले ही शादी हुई थी। पत्नी उजाला का रो-रोकर बुरा हाल है। पंकज के चार भाई और एक बहन है। पंकज परिवार में सबसे छोटा था।