पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर वीर जवानों को याद किया गया। जिन्होंने देश की हिफाजत करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन वीर शहीदों के परिवार के मन में एक ओर जहां पिता, बेटे, पति, भाई की देश के लिए शहादत पर गर्व है तो वहीं दूसरी ओर उन्हें हमेशा के लिए खो देने का दर्द भी है। इन परिवारों ने अपनों की कुछ निशानियों को आज भी सहेजे हुए रखा है। इन निशानियों में ही गर्व और दर्द दोनों छिपे हैं। किसी घर में उनकी वर्दी रखी है तो किसी घर में उनकी शहादत के बाद सम्मान में दिए गए मेडल और स्मृतिचिन्ह हैं। कहीं पिता और भाई शहीद हुए तो बेटी ने वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा के लिए शपथ ले ली तो किसी शहीद के बेटे ने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठा लिया है। जबकि कुछ परिवारों को इस बात का भी दुख है कि शहादत के वक्त जो वादे किए गए थे। वो आज तक पूरे नहीं हो सके हैं।