हिना सैफी
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पढ़ाई छोड़कर फुटबॉल सिलने के काम में लग जाते हैं बच्चे
हिना बताती हैं कि मैं जिस परिवेश से ताल्लुक रखती हूं, वहां लड़कियों की शिक्षा को महत्तव नहीं दिया जाता। मेरे लिए भी सभी सोचते थे कि दसवीं पास कर लेगी, थोड़ा सा उर्दू का ज्ञान हासिल कर लेगी और फिर शादी कर ससुराल चली जाएगी। लेकिन मैं आगे बढ़ना चाहती थी। मैंने पढाई जारी रखी। घर में छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी, उसके लिए मंजूरी थी लेकिन घर से बाहर निकलकर कुछ करना बहुत बड़ा काम था। गांव में ज्यादातर बच्चे पढ़ाई न कर फुटबॉल सिलने का काम करते थे मैं उनके लिए भी कुछ करना चाहती थी।