यश रस्तोगी तीन बहनों का इकलौता का भाई था। घर में सब उसको प्यार से गोलू कहते थे। दो बहनों की शादी हो चुकी है, तीसरी बहन यश से छोटी है। दोपहर को पोस्टमार्टम के बाद यश का शव जागृति विहार में पहुंचा तो परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। माता-पिता बार-बार बेहोश हो रहे थे। परिवार के लोग बोले कि हत्यारोपियों को फांसी की सजा हो, तभी हमें इंसाफ मिलेगा।
वहीं यश की मौत से जागृति विहार में परिवार को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। सूरजकुंड श्मशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार हुआ। चचेरे भाई दीपांशु ने मुखाग्नि दी।
शावेज की फैक्टरी पर चले बुलडोजर
लोगों ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी शावेज की फैक्टरी पर बुलडोजर चलना चाहिए। आरोपियों के घर पुलिस ध्वस्त करें। उनके परिवार और अन्य लोग भी देखें कि किसी के परिवार के इकलौते बेटे की हत्या करने का परिणाम कैसा होता है।