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वंदे भारत ट्रेन हादसा: खुद को कोसता रहा पिता, बोला- बेटी की मान लेता तो बच जाता परिवार, उजड़ गईं तीन जिंदगियां

Tue, 31 Oct 2023 06:07 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

वंदे भारत ट्रेन हादसा: खुद को कोसता रहा नरेश, बेटी की मान लेता तो बच जाता परिवार, उजड़ गईं तीन जिंदगियां
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मेरठ ट्रेन हादसा, पत्नी और बच्चियों के फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में कंकरखेड़ा के कासमपुर रेलवे फाटक पर वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से मोना (40) पत्नी नरेश व बेटी इशिका (14) और चारू (7) की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मचा रहा। घर से लेकर मोर्चरी तक चीत्कार मचा रहा। हर कोई यही कहता रहा कि नरेश अगर कुछ देर रुक जाता तो आज परिवार नहीं उजड़ता।

पत्नी और दो बेटियों को खोने वाला नरेश रात से ही बेसुध है। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, मोर्चरी पर तीनों शवों का पोस्टमार्टम शुरू हुआ तो हर आंख नम हो गई। महिलाएं विलाप करते-करते बदहवास हो गईं।
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रोता बिलखता पिता - फोटो : Amar Ujala
नरेश खुद को कोसता रहा कि अगर कुछ देर रुक जाता तो परिवार इस तरह खत्म नहीं होता। पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों का ब्रजघाट श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
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मौके पर जमा लोग - फोटो : Amar Ujala
दोनों बहनें थी पढ़ाई में तेज
चारू, इशिका की बुआ और चाची का रो-रोकर बुरा हाल है। वो बार-बार चारू और इशिका का नाम लेकर विलाप करती रहीं। बोलती रहीं कि चारू नौवीं में और इशिका पांचवीं में विद्या सागर बड़ा बाजार स्कूल में पढ़ती थीं। दोनों पढ़ने में बेहद तेज थी। कहती थीं कि पढ़-लिखकर मम्मी-पापा की गरीबी दूर करेंगी। लेकिन ऐसी घटना हो जाएगी, इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। नरेश की मजबूरी पर हर किसी की आंख नम हो गई। लोग यही कहते रहे कि बेटा जेल में है, पत्नी और दो बेटियों की मौत का सदमा नरेश कैसे झेल पाएगा। 

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मौके पर पड़े शव - फोटो : Amar Ujala
बता दें कि नरेश चार भाइयों में तीसरे नंबर का है। बड़े भाई पप्पू की मौत हो चुकी है। दूसरे नंबर के राजू हैं। सबसे छोटे नरेश हैं। नरेश की चार बहनें हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि पहले नरेश छोटा बाजार में रहता था, 10 दिन पहले ही यहां बड़ा बाजार में किराए पर कमरा लिया था।
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एसपी देहात - फोटो : Amar Ujala
बेटी की बात मान लेता तो बच जाता परिवार
नरेश ने बताया कि जब वह ट्रैक पार कर रहा था तो बड़ी बेटी इशिका ने उससे रुकने के लिए कहा था। वह बोली थी कि पापा रुक जाओ, ट्रेन आ रही है। लेकिन वह नहीं रुका और हादसा हो गया। रोते हुए नरेश ने बताया कि काश मैं बेटी की बात मान लेता तो आज परिवार मेरे साथ होता। अब जिंदगी भर अकेला ही तड़पता रहूंगा।

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वंदे भारत एक्सप्रेस। - फोटो : अमर उजाला
ये है घटना
सदर थाना क्षेत्र के रजबन बड़ा बाजार निवासी नरेश (45) रविवार शाम पत्नी मोना और दो बेटियों चारू और इशिका को ठेले में लेकर कंकरखेड़ा के अशोकपुरी अपनी बहन लक्ष्मी के घर जा रहा था। रास्ते में वंदे भारत ट्रेन आने की वजह से कासमपुर फाटक बंद था। फाटक के नीचे से ठेला निकाल कर चारों रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। इसी बीच दिल्ली की तरफ से आ रही वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से नरेश की पत्नी व दोनों बेटियों की मौत हो गई। जबकि नरेश बाल-बाल बच गया। चार महीने से जेल में बंद अपने बेटे की जमानत के मामले में नरेश बहन के घर जा रहा था।

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