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शिक्षक दिवस पर विशेष: अपने वेतन और मेहनत से बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, कोरोना काल में भी ऐसे बांटा ज्ञान

Sat, 05 Sep 2020 01:26 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रधानाध्यापिका पुष्पा यादव और सरकारी स्कूल की फोटो - फोटो : अमर उजाला
जीवन में शिक्षक का महत्व सबसे ऊपर होता है। वह एक व्यक्ति के चरित्र, क्षमता और भविष्य को संवारने का काम करता है। महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि जो लोग बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं, वे उनके मुकाबले ज्यादा सम्मान के हकदार होते हैं, जो उन्हें पैदा करते हैं, क्योंकि माता-पिता सिर्फ बच्चों को जन्म देते हैं, जबकि शिक्षक उनको अच्छे से जीने का तरीका सिखाते हैं। मेरठ जिले में भी कुछ ऐसे शिक्षक हैं, जो छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने किसी न किसी माध्यम से छात्रों तक ज्ञान पहुंचाया है। आज (5 सितंबर) शिक्षक दिवस के मौके पर हम ऐसे शिक्षकों से आपको रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र में लगा दिया...
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वाणिज्य शिक्षक विवेक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में भी शिक्षक किसी न किसी माध्यम से बांट रहे ज्ञान 
केके इंटर कॉलेज के वाणिज्य शिक्षक विवेक विश्नोई और हिंदी के शिक्षक मनीष सिंह। विवेक विश्नोई ने विद्यालय में सबसे पहले यूट्यूब चैनल से शिक्षण कार्य शुरू किया था। इनके चैनल पर करीब 70 वीडियो अपलोड हैं। इसके अलावा छात्रों की प्रतिभा को उभारने के लिए समय-समय पर ऑनलाइन प्रतियोगिता भी करवाते रहते हैं। वर्तमान में ऑनलाइन टैलेंट हंट प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें छात्र नृत्य, गायन, आविष्कार, सामाजिक संदेश की वीडियो भेज रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कॅरियर काउंसिलिंग से संबंधित वीडियो भी अपलोड किए हैं। 
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हिंदी के शिक्षक मनीष सिंह - फोटो : अमर उजाला
मनीष सिंह ने हिंदी के लेक्चर सरल भाषा में अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए हैं। प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स भी इनके वीडियोज को काफी पसंद कर रहे हैं। दोनों शिक्षकों का कहना है कि कोरोना के इस दौर में भी शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए बस वह इसी कोशिश में लगे हुए हैं। 

अपने वेतन और मेहनत से बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर

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प्रधानाध्यापिका सारिका गोयल - फोटो : अमर उजाला
हमेशा मेहनत से मिली सफलता
प्राथमिक विद्यालय भूड़बराल एक की प्रधानाध्यापिका सारिका गोयल को इस बार राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 2006 से वह बेसिक शिक्षा विभाग में हैं। वह बताती हैं कि अपने वेतन से भी बच्चों की किताबें, ड्रेस दिलाई। बच्चों के परिवार के सदस्यों से मोबाइल पर लगातार बात करती हैं। उन्होंने हमेशा शिक्षकों का यह वाक्य आदर्श माना कि ‘आप पढ़ते रहिए और पढ़ाते रहिए’ सफलता जरूर मिलेगी।
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सहायक अध्यापिका यतिका पुंडीर - फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई की ललक की पैदा
प्राथमिक विद्यालय कमालपुर (अंग्रेजी माध्यम) की सहायक अध्यापिका यतिका पुंडीर को वर्ष 2019 में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह बताती हैं कि विद्यालय में अपने प्रयासों से वर्ष 2012 से स्मार्ट क्लास का संचालन किया जा रहा है। 2012 से ही इनफार्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जरूरतमंद बच्चों को किताब-कापियां, स्टेशनरी समेत अन्य मदद भी की जाती है।
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प्रधानाध्यापिका पुष्पा यादव - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश स्तर पर स्कूल को दिलाई पहचान
प्राथमिक विद्यालय रजपुरा की प्रधानाध्यापिका पुष्पा यादव बताती हैं कि 2013 से वह विद्यालय में हैं। रजपुरा और आसपास के गांवों के उन बच्चों के दाखिले किए जो कभी पढ़ने नहीं आते थे। 62 बच्चों में से मात्र 28 ही स्कूल आते थे। आज 174 बच्चे स्कूल में हैं। 2018 में साफ-सफाई और बेहतर शिक्षा के लिए विद्यालय शिक्षा विभाग की साइट पर एक साल तक प्रथम स्थान पर रहा। खुद ही स्कूल में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया। लाइब्रेरी भी बनवाई। 
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प्राथमिक विद्यालय रजपुरा - फोटो : अमर उजाला
ये निजी नहीं, सरकारी स्कूल है...
प्राथमिक विद्यालय रजपुरा की कुछ वर्षों पहले जहां टूटी दीवारें थीं, लंबे समय से रंगाई पुताई नहीं हुई थी। परिजन बच्चों को स्कूल तक भेजना पसंद नहीं करते थे। आज उस स्कूल की सूरत बदल चुकी है। आज यहां पर 174 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। आदर्श प्राथमिक विद्यालय कूड़ी भी किसी निजी स्कूल से कम नहीं है। साफ-सुथरी दीवारें, स्कूल परिसर में इंटरलॉक टेलिंग। हरे-भरे पौधे यहां दिखाई पड़ते हैं। तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र बच्चों को प्रोजेक्टर, कंप्यूटर से पढ़ाई कराते हैं।

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मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर प्रो. डॉ टीवीएस आर्य - फोटो : अमर उजाला
एड्स के खिलाफ चला रहे मुहिम
मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर प्रो. डॉ टीवीएस आर्य स्कूल और कॉलेजों में एड्स के प्रति जागरूकता मुहिम भी चल रहे हैं। वह हर साल 100 से ज्यादा माध्यमिक और उच्च शिक्षा केंद्रों पर जाकर कार्यशालाएं करते हैं। एड्स के लक्षण, कारण और निवारण बताते हैं। उनका कहना है कि छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें जागरूक कर खुशी मिलती है। ऐसा वह पिछले कई सालों से कर रहे हैं।
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सीसीएसयू की ललित कला विभाग की छात्राओं ने पोस्टर बनाकर मनाया शिक्षक दिवस। - फोटो : अमर उजाला
ऑनलाइन पोस्टर बनाकर शिक्षकों को किया याद 
चौधरी चरण सिंह विवि के ललित कला विभाग के छात्र-छात्राओं ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन पोस्टर बनाकर शिक्षकों को याद किया। कोविड-19 के संकट में शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन शिक्षण द्वारा छात्रों को शिक्षित करने हेतु विद्यार्थियों ने शिक्षकों डॉ. अलका तिवारी, समन्वयक ललित कला विभाग, डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ और डॉ. शालिनी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान प्राची जैन, सुधा सागर, किरण यादव, लक्ष्य कुमार, अंजलि, सुमित, कनिका तथा विनीता चौहान आदि मौजूद रहे।

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